16 साल का मनोज चल बसा. उसने केरल में तिरुवनंतपुरम के पास विलापिलासाला में अपने घर में फांसी लगा कर जान दे दी. और जिम्मेदार माना जा रहा है ब्लू वेल को. मनोज की मां अनु रामचंद्रन ने एक टीवी चैनल को बताया, “नवंबर में उसने मुझे ब्लू वेल गेम के बारे में बताया था. उसने कहा कि इस गेम में या तो मुझे मर्डर करना पड़ेगा या फिर स्यूइसाइड.”
ब्लू वेल एक ऑनलाइन गेम है. इसमें खेलने वालों को खतरनाक चैलेंज दिए जाते हैं. जैसे कि मनोज की मां बताती हैं कि वह एक नदी में कूद गया था जबकि उसे तैरना नहीं आता था. अनु रामचंद्रन ने मनोज को यह गेम खेलने से मना किया था.
ऐसी ही एक मौत और हो चुकी है. हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि मौत की वजह वाकई ब्लू वेल है या नहीं. अभी बस इतना पता है कि दो आत्महत्याएं हुई हैं और दोनों की मांएं कह रही हैं कि ब्लू वेल जिम्मेदार है. लेकिन पुलिस इसे लेकर निश्चित नहीं है. केरल के के इंस्पेक्टर जनरल मनोज अब्राहम ने एनडीटीवी से कहा, “ये सारी मौतें डिप्रेशन से जुड़ी हैं और इसके लक्षण वही हैं जो ब्लू वेल में दिखते हैं. लेकिन अभी हम इस बात को पुष्ट नहीं कर सकते कि जानें ब्लू वेल की वजह से ही गई हैं या नहीं.”
पूरे भारत में कई ऐसी मौतें हो चुकी हैं. जिन्हें लेकर ब्लू वेल गेम पर संदेह है. देहरादून, इंदौर, मुंबई, पश्चिमी मेदिनापुर, शोलापुर, कन्नूर और त्रिवेंद्रम में कम से कम 7 किशोर खुदकुशी कर चुके हैं. और दुनियाभर में तो 100 से ज्यादा मामले आ चुके हैं. बात इतनी गंभीर है कि सरकारें माता-पिताओं को कह रही हैं कि अपने बच्चों का ध्यान रखें. कई नेताओं ने ऑनलाइन कंपनियों से कहा है कि अपने यहां से ब्लू वेल गेम को हटाएं. केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया से कहा कि हमने सभी टेक कंपनियों को अपने प्लैटफॉर्म से ब्लू वेल को हटाने को बोल दिया है.
होता यूं है कि गेम खेलने वाले को ऐडमनिस्ट्रेटर कोई चैलेंज देता है. और उसके पास उन्हें पूरा करने के लिए 15 दिन होते हैं. शुरुआत बहुत आसान सी चुनौतियों से होती है जैसे कि कोई खास तरह का म्यूजिक सुनो. या इतने घंटे चलो. या कोई डरावनी फिल्म देखो. और फिर धीरे धीरे चुनौतियों की गंभीरता और कठिनाई बढ़ती जाती है. जैसे खेलने वाले से कहा जाता है कि दिनभर किसी से घर में बात ना करो. और फिर जैसा कि खेलने वालों ने बताया है, बात खुदकुशी या हत्या करने तक भी पहुंच जाती है. केरल के एक किशोर ने अपनी जान लेने से कुछ हफ्ते पहले अपनी मां से पूछा था कि अगर मैं मर जाऊं तो तुम्हें कैसा लगेगा.
यूरोप और अमेरिका में स्कूलों ने अडवाइजरी जारी कर दी है. भारत में तो सुप्रीम कोर्ट तक इस पर बात कर चुका है. कुछ दिन पहले भारत के मुख्य न्यायधीश ने कहा था कि हमने इस इस गेम बारे में सुना कि यह कुछ भी करवा सकता है.
यहां तक कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने भी ब्लू वेल पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि मैंने आज इस गेम के बारे में सुना है कि ये तो कुछ भी करवा सकता है. लेकिन सिर्फ जानकार कह रहे हैं कि चिंताएं जताना ही काफी नहीं है. साइबर एक्सपर्ट विराग गुप्ता ने एनडीटीवी से कहा कि सरकार सिर्फ सलाहें दे रही है, जो काफी नहीं है. वह कहते हैं, “सरकार ने एक पत्र जारी किया है, जिसे प्रतिबंध कहा जा रहा है लेकिन मुझे तो ये सलाह जैसा लगता है.”
"I believe there is a larger issue here around youth suicide and the impact of factors such as bullying on youth suicide rates. The Blue Whale Game has merely put to the forefront an issue that already exists. As a community we should be focusing on building resilience in young people, encouraging help seeking and eradicate bullying. When we do so, we will help to reduce the factors that lead to high rates of youth suicide, such as the Blue Whale Game."
- Pritika Desai, Project Leader and Founder of ShootOut
लेकिन विशेषज्ञ ब्लू वेल के कराण होने वालीं मौतों के पीछे की असली वजह पर भी बात करना चाहते हैं. नॉर्दर्न टेरिटरी में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए शूटआउट नाम का प्रोजेक्ट चलाने वालीं प्रीतिका देसाई कहती हैं कि जरूरत किशोरों को मानसिक रूप से मजबूत किए जाने की है. वह कहती हैं, “ब्लू वेल ने भी वही बात उभारी है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर कितना ध्यान दिए जाने की जरूरत है. हमें दरअसल बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना होगा ताकि ब्लू वेल जैसे खतरे उन्हें आहत न कर सकें.”
इस गेम के लिए सबसे जरूरी कड़ी मां-बाप को माना जा रहा है. विशेषज्ञ कहते हैं कि अपने बच्चे की निगरानी करें और अगर उसके व्यवहार में जरा सी भी अजीब बात लगे तो सचेत हो जाएं.




