क्या डबल दिसलुशन का निर्णय सही था?

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Voting Source: Amit Sarwal

प्रोफेसर प्रदीप तनेजा के अनुसार किसी भी प्रधानमंत्री के लिये यह फैसला करना काफी कठिन और गम्भीर निर्णय होता है!


प्रधानमंत्री Malcolm Turnbull को भरोसा है की वह फिर एक बार कोएलिशन की सरकार का नेतृत्त्व करेंगे!

तो दूसरी ओर विपक्ष के नेता Bill Shorten मानते हैं की लोगों ने इन चुनावों में कोएलिशन को नकार दिया है और सम्भवता वह लेबर पार्टी की सरकार बन्येंगे!

इन चुनावों और इसके नतीजों का ऑस्ट्रेलिया के राजनितिक परिद्रशय पर गहरा असर पडेगा!

मंगलौर से आकर मेलबोर्न को अपना घर कहने वाले वैद्य व्यास भट ऑस्ट्रेलिया की प्रेफेरेंटिाल वोटिंग प्रणाली से बेहद खुश हैं. 

वैद्य की तरह ही कश्मीर से क्वींसलैंड में आकर बसे आतिफ शफी ने इस बार लिबरल पार्टी को वोट दिया.

आतिफ मानते हैं की ऑस्ट्रेलिया में आर्थिक स्थिरता आ सके इसलिये ऐसा जरूरी था!

परन्तु चुनावी नतीजों से आतिफ थोड़ा सा निराश है!

वहीँ मेलबोर्न के रहने वाले मितेश ऑस्ट्रेलियाई राजनीती में ख़ास रूचि रखते हैं!

मितेश का मानना है की प्रधानमंत्री Malcolm Turnbull ने व्यर्थ में ही ‘double dissolution’ का निर्णय लिया!

परन्तु प्रोफेसर प्रदीप तनेजा के अनुसार किसी भी प्रधानमंत्री के लिये यह फैसला करना काफी कठिन और गम्भीर निर्णय होता है!

इस बार Bill Shorten की तरह ही मितेश को भी उम्मीद है की यदि अब लेबर पार्टी की सरकार आये तो उन्हें बेहद खुशी होगी!

डॉ रवि बत्रा जो दस साल पहले दिल्ली से ऑस्ट्रेलिया आये मानते हैं की दोनों देशों में राजनीती काफी भिन्न है!

डॉ बत्रा के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में अपने नेता को जानने का मौका लोगों के पास थोड़ा कम है!

वह साथ ही इस बात से निराश हैं की बड़ी संख्या में लोग लेबर पार्टी की मेडिकेयर के बारे कोएलिशन की निति में बदलाव या निजीकरण व वाले झूठे बहकावे में आ गए!

गोल्ड कोस्ट में रहने वाली सीमा चौहान लिबरल नेशनल पार्टी की समर्थक हैं तथा मानती हैं की ऑस्ट्रेलिया की राजनीती में विभिन्न सांस्कृतिक समुदायों के लोगों को भी अब राष्ट्रीय नेतृत्व के लिये आगे आना चहियहए!

ऑस्ट्रेलिया में इस बार अल्पमत वाली सरकार का आना तय है.

अब किस की सरकार आएगी यह तो कुछ दिनों में सामने आ ही जाएगा!

मेलबोर्न के रहने वाले धर्मेश मानते हैं की जो भी सरकार बनएगा उसे निर्दलीयों और छोटे दलों के नेताओं से सीधे निपटना पडेगा!

चुनावी प्रक्रिया, double dissolution तथा चुनावों के नतीजों के बारे में भारतीये मूल के लोगों का क्या सोचना है इस पर अधिक जानकारी के लिये सुनिये अमित सारवाल की ख़ास रिपोर्ट!


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