आपको पता हैं ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के तमाम देश अपने हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और यहां तक कि हाइवेज़ पर भी लोगों के शरीर के तापमान का परीक्षण शुरू कर रहे हैं. अगर आप अब तक ये सोच रहे हैं कि ऐसा क्यों किया जा रहा है तो आपको बता दें कि ये उन लोगों को पहचानने के लिए किया जा रहा है जो संभावित तौर पर चीन से फैल रहे एक नए वायरस से संक्रमित हो सकते हैं.
अहम सवाल ये कि क्या है नया वायरस? क्या ये ख़तरनाक है? और इसे फैसने से रोकने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए? ये वर्तमान में बहुत महत्वपूर्ण सवाल हैं चलिए इनके जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं.
बड़ी बात ये है कि इस सप्ताह के अंत में यानी 25 जनवरी से लूनर न्यू ईयर का उत्सव शुरू होने की वजह से विश्व भर में इस नए कोरोनावायरस के फैलने का खतरा बढ़ गया है. ज़ाहिर है अब पूरे विश्व में स्वास्थ्य अधिकारी ऐसे लोगों को तलाश रहे हैं जिनमें नए कोरोनावायरस के लक्षण हो सकते हैं.
अब पहले सवाल का जवाब क्या है कोरोनावायरस इस बारे में डॉक्टर नथाली मैकडरमोट जो लंदन के किंग्स कॉलेज में एक बाल संक्रामक रोगों की विशेषज्ञ हैं, कहती हैं कि
इस वायरस के क्राउन की तरह का आकार होने की वजह से इसका नाम कोरोनावायरस दिया गया है. और ये एक आरएनए वायरस है पूरी दुनिया में कोरोनावायरस की कई प्रजातियां हैं.
दुनिया भर से मिल रही तेज़ प्रतिक्रिया के पीछे एक बड़ी वजह है.. और वो वजह है साल 2002-03 में सार्स नाम की बीमारी जैसी किसी भी स्थिति को रोकना. ये वायरस भी नए वायरस से मिलता-जुलता था. और ये बीमारी भी चीन से ही शुरू हुई थी. जिसमें करीब 8 सौ लोगों की जान ले ली थी. सार्स जैसे वायरस के बारे में बताते हुए रूटी हिल मेडिकल सेंटर से डॉक्टर विनय मेहरा बताते हैं कि
ये वायरस ऐसे होते हैं जो मनुष्यों और जानवरों दोनों में पाए जाते हैं. लेकिन ये कभी भी जानवरों से मनुष्यों में आ जाता है. जैसे सार्स वायरस बिल्लियों से आया था.
चीन के शहर वुहान शहर में पहली बार पाया गया ये नया कोरोनावायरस इससे पहले कभी भी मनुष्यों में नहीं देखा गया है. हालांकि ये संभव है कि कुछ कोरोनावायरस मनुष्य और जानवरों के बीच फैल सकते हैं. इससे पहले भी कई कोरोनावायरस जानवरों में पाए गये हैं लेकिन किसी से भी मनुष्यों में अब तक संक्रमण नहीं फैला था. लेकिन अब दुनिया भर में कुछ नए वायरस भी खोजे गए हैं. डॉक्टर मैक्डरमौट कहते हैं कि एक बार ये वायरस शरीर में प्रवेश कर जाते हैं तो ये शरीर की कोशिकाओं में घुसने की कोशिश करते हैं.
चीन के वुहान से मिल रही जानकारियों के मुताबिक वहां ज्यादातर मामले हल्के से मध्यम श्रेणी के हैं. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मामले बेहद गंभीर हैं. और कुछ मौतें भी हुई हैं. खास बात ये है कि अभी तक इस बात के पुख़्ता आंकड़े नहीं हैं. कि इस वायरस से कितने लोग संक्रमित हैं. और ये ही वजह है कि इस बात का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है कि ये एक सामान्य वायरस है या फिर गंभीर तौर पर फैल रहा है.
ज़ाहिर तौर पर उन लोगों में किसी भी वायरस से संक्रमित होने संभावना ज्यादा होती है जो कि पहले से ही बीमार हैं. या फिर बच्चों और बुज़ुर्गों में. इस बीच बर्लिन के चैरिटे अस्पताल में इंस्टिट्यूट फॉर वाइरोलॉजी से चिकित्सा अनुसंधानकर्ता डॉक्टर क्रिश्चियन ड्रॉस्टन ने घोषणा की है कि उन्होंने इस खास वायरस की पहचान के लिए पहला टेस्ट विकसित किया है. उनका कहना है कि ये नया वायरस सार्स से मिलता जुलता है.. और ये हो सकता है कि ये उसी प्रजाति से संबंधित हो. डॉक्टर ड्रोस्टन और उनके सहयोगियों द्वारा विकसित किया गया ये नया टेस्ट दुनिया भर की करीब 120 प्रयोगशालाओं को भेजा गया है.
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रोफेसर ब्रेंजन मर्फी कहते हैं कि हालांकि अभी तक दुनिया भर में 200 से ज्यादा मामले रिपोर्ट किए गए हैं लेकिन ये आशंका है कि संक्रमित लोगों का आंकड़ा इससे काफी ज़्यादा हो सकता है. क्योंकि हो स कता है कि कई लोगों पर इस वायरस के गंभीर लक्षण नहीं दिखायी दे रहे हों.
प्रोफेसर मर्फी ने कहा है कि भी स्थिति बेहतर है. उन्होंने दावा किया कि अगर किसी में ये बीमारी पायी भी जाती है तो ऑस्ट्रेलिया इससे निपटने के लिए अच्छी तरह तैयार है.





