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कैसे और क्यों होता है निर्वासन?

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जगदीप सिंह नाम के एक भारतीय को डिपोर्ट करने का फैसला किया गया है. इमिग्रेशन मंत्री पीटर डटन ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जगदीप सिंह को निर्वासित करने का फैसला लिया है. अब यह समझने की जरूरत है कि किसी व्यक्ति को किन परिस्थितियों में निर्वासित किया जाता है और उसके साथ फिर क्या होता है. इस विषय में बात करने के लिए हमारे साथ हैं जानेमाने माइग्रेशन कंसल्टेंट धीरेश कोहली.


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By Vivek Asri

Source: SBS



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जगदीप सिंह नाम के एक भारतीय को डिपोर्ट करने का फैसला किया गया है. इमिग्रेशन मंत्री पीटर डटन ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जगदीप सिंह को निर्वासित करने का फैसला लिया है. अब यह समझने की जरूरत है कि किसी व्यक्ति को किन परिस्थितियों में निर्वासित किया जाता है और उसके साथ फिर क्या होता है. इस विषय में बात करने के लिए हमारे साथ हैं जानेमाने माइग्रेशन कंसल्टेंट धीरेश कोहली.


धीरेश जी, वे क्या परिस्थितियां होती हैं जबकि सरकार किसी व्यक्ति को डिपोर्ट करने का फैसला करती है?

इसमें कुछ कानूनी पहलू देखने पड़ेंगे. ऑस्ट्रेलिया सरकार के पास एक सेक्शन 200 है जो ऑस्ट्रेलियन माइग्रेशन एक्ट के अंदर आता है. इसमें है कि कौन अ-नागरिक, यानी नॉन-सिटिजन है, उस पर सब सेक्शन 201, 201 और 203, तीनों सेक्शंस अलग-अलग अप्लाई हो सकते हैं. तो ज्यादातर ये होता है कि कोई नॉन-सिटिजन ऑस्ट्रेलिया में अगर 10 साल से कम रहा है और उसने कोई ऐसा क्राइम किया है जिसके लिए उसे 12 महीने की सजा मिली है, तो इमिग्रेशन मिनिस्टर के पास यह शक्ति है कि उसे डिपोर्ट कर सके.

दूसरा है कि अगर किसी इंसान ने ऐसी कुछ हरकत की है जो ऑस्ट्रेलियन कॉमनवेल्थ की सुरक्षा को खतरा पहुंचाता है और एजीओ उसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा मानता है.

और तीसरा है कि अगर कोई राष्ट्रद्रोह करता है, ऑस्ट्रेलियन क्रिमिनल कोड के सेक्शन 80 के तहत तो मंत्री उसे भी डिपोर्ट कर सकता है.

तो क्या यह मंत्री की मर्जी पर आधारित फैसला होता है?

आमतौर पर यह सब्जेक्टिव नहीं होता. वीसा कैंसलेशन एक साधारण मामला नहीं होता. इस मामले में मंत्री को एकदम अंतिम फैसला लेना होता है.

क्या नागरिकता लेने के बाद भी डिपोर्ट किया जा सकता है?

सिटिजनशिप लेने के बाद डिपोर्ट करना बहुत मुश्किल है. लेकिन कुछ साल पहले ऐसा एक केस हुआ था जबकि व्यक्ति की नागरिकता भी रद्द की गई थी.

और यह पूरी प्रक्रिया क्या है?

डà_`« _+    _j_ؓ_ƒ_Ŀपोर्टेशन से पहले वीसा रद्द करने की प्रक्रिया होती है. ऐसा दो तरह से किया जा सकता है. पहला तो डिपार्टमेंट ऑफ इमिग्रेशन के जरिए. इस डिपार्टमेंट का केस ऑफिसर फैसला करता है कि आपने इन कानूनों का उल्लंघन किया है, आपका चरित्र ठीक नहीं है, आपको 12 महीने की जेल हुई है, हम आपका वीसा कैंसल करते हैं. यहां तक मंत्री की दखलअंदाजी नहीं होती. इस मामले में व्यक्ति ट्राइब्यूनल में अपनी बात रख सकता है. 28 दिन के अंदर उसे अपनी अपील दायर करनी होती है कि क्यों मेरा वीसा कैंसल ना किया जाए और क्यों मुझे डिपोर्ट ना किया जाए.  लेकिन, मंत्री ने यदि खुद फैसला किया है, तो उसके बाद व्यक्ति के बाद अपील करने का अधिकार नहीं है, जैसा कि जगदीप सिंह के मामले में हुआ.

 

निर्वासन का व्यक्ति की जिंदगी पर क्या असर पड़ता है?

अगर आप डिपोर्ट हो जाते हैं तो फिर आप कभी ऑस्ट्रेलिया नहीं आ सकते. आपके ऊपर ऑस्ट्रेलिया आने पर पूरी तरह प्रतिबंध लग जाएगा. और आपके परिवार को भी आपके साथ डिपोर्ट किया जा सकता है. फिर आप उन देशों की भी यात्रा नहीं कर सकते, जिनके साथ ऑस्ट्रेलिया अपनी सूचनाएं साझा करता है. जैसे अगर आप ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट किए गए हैं और अमेरिका की यात्रा करते हैं तो बहुत संभव है कि आपको अमेरिका के एयरपोर्ट से लौटा दिया जाए.


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