कोरोनावायरस से लड़ने के लिए विश्व को चाहिए आर्थिक मदद-WHO

Tedros Adhanom Ghebreyesus, Director General of the World Health Organisation (WHO).

Tedros Adhanom Ghebreyesus, Director General of the World Health Organisation (WHO). Source: AAP

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के देशों को नोवेल कोरोनावायरस से निपटने के लिए तैयार होने में मदद देने के लिए लोगों से करीब 675 मिलियन अमेरिकी डॉलर के दान का अह्वान किया है. डब्लू एच ओ ने बात तब कही है जबकि चीन से बाहर भी कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 190 से ज्यादा हो गया है.


ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मांगा गया अनुदान करीब 1 बिलियन डॉलर का है. ये पैसा दुनिया भर के देशों को कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए दिया जाएगा. साथ ही सभी देशों के इसके लिए तैयार किया जाएगा कि वो कोरोनावायरस के मामलों को पकड़ सकें और मरीज़ों की चिकित्सकीय देखभाल कर सकें. 

क्यों ज़रूरत है विश्व के देशों को अनुदान की?

योजनाबद्ध तैयारियों और प्रतिक्रिया के पीछे ये उद्देश्य हैं कि इस वायरस को मनुष्य से मनुष्य में फैलने से रोका जाए. इसके संक्रमण को जल्द से जल्द पहचाना जाए, संक्रमित लोगों को दूसरे लोगों से अलग रखा जाए साथ ही उन्हें संक्रमण के शुरूआती दौर में ही चिकित्सकीय मदद मुहैया कराई जाए. इसके अलावा इस ख़तरे से दूसरों को आगाह करना, इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को कम करना, जानवरों से इस वायरस के फैलने को रोकना भी इस योजना में शामिल है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल टेडरॉस गेबरीएस़ॉस का कहना है कि करीब 89 मिलियन डॉलर की राशि संगठन के संचालन में खर्च किया जाएगा. जबकि बाकी का पैसा उन देशों को दिया जाएगा जिन्हें इस वायरस से सुरक्षा में मदद की ज़रूरत होगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन की ये चिंता इसलिए सामने आई हैं क्योंकि नए कोरोनावायरस के फैलने के बाद ये पहली बार हुआ है कि महज़ एक दिन में इस वायरस के रिकॉर्ड मामले सामने आए हैं.

चीन की बात करें तो यहां अब तक कोरोनावायरस के 24 हज़ार 3 सौ से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. ये ही नहीं विश्व की 24 दूसरे देशों में भी अब तक 190 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया में 6 फरवरी तक इन मामलों की संख्या 14 हो चुकी है.

डॉक्टर टेडरॉस ने बताया कि डब्लू एच ओ दुबई और अकरा में अपने गोदामों से 24 देशों को करीब 500 हज़ार मास्क और 40 हज़ार रेस्पीरेटर भेज रहा है.

चीन की आलोचना

डब्लू एच ओ की आपात समिति के सदस्य और कर्टिन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर जॉन मैकेंज़ी ने वायरस के संक्रमण को लेकर चीन की शुरूआती प्रतिक्रिया की आलोचना की है. उन्होंने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि शुरूआती मामले तेज़ी से रिपोर्ट नहीं किए गए. लेकिन डॉक्टर टेडरॉस ने कहा है कि अगर चीन ने इन मामलों को छुपाया है तो उन्हें आशंका है कि संक्रमण के मामले कहीं ज्यादा हो सकते हैं. 

जेनेवा में होगा मंथन

आपको बता दें कि इस वायरस की रोकथाम के लिए शोध और दवा की खोज, पहचान और वैक्सीन के लिए अगले हफ्ते जेनेवा में सैकड़ों विशेषज्ञों की बैठक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन में महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर मारिया वान केरखोव का कहना है कि इस बैठक में शामिल लोगों में पूरे विश्व के शोधकर्ता, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अग्रिम पंक्ति में काम करने वाले लोग होंगे.

डॉक्टर माइक रायन ने जानकारी दी है कि अभी तक कोई भी दवा ऐसी नहीं है जिससे कि इस वायरस से संक्रमण का इलाज़ किया जा सके. बताया जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम चीनी प्रशासन की मदद करने के लिए चीन जा सकती है. जिसमें कई देशों के विशेषज्ञ शामिल होंगे.


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