ऑस्ट्रेलिया में वित्तीय दुर्व्यवहार एक ऐसी समस्या है जिसकी शिकायत बेहद कम होती है. अब इस तरह के मामलों के लिए एक ख़ास सेवा शुरू की गई है.
विशेषज्ञों और वकीलों का मानना है कि इस तरह की समस्याओं के बारे में बढ़ती जागरुकता के बावजूद पैसों के लिए दुर्व्यवहार के मामले भी बढ़ रहे हैं. हालांकि इसमें सबसे ख़ास बात ये है कि ज्यादातर लोग इस बात से अंजान हैं कि जो कुछ उनके साथ हो रहा है वो उत्पीड़न की श्रेणी में आता है और वो वित्तीय दुर्व्यवहार के शिकार हो रहे हैं.
सिडनी में रहने वाली रिचेल नातोली भी घरेलू हिंसा का शिकार हो चुकी हैं लेकिन आज वो इस क्षेत्र में जागरुकता फैलाने का काम करती हैं. वो कहती हैं कि जब उन्होंने आठ साल लंबे शारीरिक और भावनात्मक तौर पर अपमानजनक रिश्ते को छोड़ा था तो उन्होंने कभी भी नहीं सोचा था कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ख़राब दौर अभी उनका इंतज़ार कर रहा था. उनका दावा है कि उनके पार्टनर ने हाउसिंग एन एन डब्लू में उनके खि़लाफ झूठे आरोप पेश किए.
आर एम आई टी विश्वविद्यालय के मुताबिक दो मिलियन से ज्यादा लोगों ने या तो अपनी जिंदगी में वित्तीय दुर्व्यवहार का अनुभव किया है या फिर वो ये अनुभव कर सकते हैं. और इनमें से ज्यादातर पीड़ित महिला हैं. जब बात महिलाओं में विकलांगता या फिर लंबी बीमारी की आती है तो इनमें से एक चौथाई महिलाओं को आर्थिक दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा है.
अब न्यू साउथ वेल्स में अपनी तरह की पहली फाइनेंशियल एब्यूज़ टीम गठित की गई है. ये टीम उन लोगों को कानूनी सलाह प्रदान करेगी जिन्होंने कि वित्तीय दुर्व्यवहार का सामना किया है.
सिडनी के रैडफर्न लीगल सेंटर से फाइनेंशियल एब्यूज़ टीम की लीडर बियान्की कहती हैं कि उनकी टीम हर एक मामले को प्रणाली की खामियों का पता लगाने में इस्तेमाल करेगी. जो कि भविष्य में योजनाएं और कानून में सुधार मददगार साबित होगा.
ये बात भी अहम है कि समाज के सबसे कमज़ोर लोगों को ही अक्सर आर्थिक दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ता है. आस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट ऑफ फैमिली स्टडीज़ का कहना है कि ये बुज़ुर्गों द्वारा अनुभव किया जाने वाला सबसे सामान्य दुर्व्यवहार है. प्रो बोनो के वकील अली फ्रेंच कहते हैं कि अक्सर लोगों को इस बात का अहसास नहीं होता है कि वो वित्तीय़ दुर्व्यवहार का शिकार हो रहे हैं.
घरेलू हिंसा के लिए काम करने वाली हरमन फाउंडेशन की संस्थापक हरिंदर कौर बताती हैं कि हालांकि आस्ट्रेलिया का भारतीय समुदाय एक खुशहाल समुदाय है लेकिन यहां पर भी जो घरेलू हिंसा के मामले आते हैं उनमें से कुछ में आर्थिक दुर्व्यवहार भी शामिल होता है. वो कहती हैं कि खास तौर पर भारतीय समाज से जुड़े किसी भी मामले में उन्हें पारिवारिक मूल्यों का ध्यान रखना होता है और साथ ही ये भी कि वो पीड़ित को सही कानूनी मदद दिला पाएं.
वहीं हरमन फाउंडेशन में मैनेजर एकता कहती हैं हर मामला अलग होता है और वो अलग अलग तरीके से ऐसे मामले हल करने की कोशिश करते हैं.
आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में अब तक तस्मानिया कही अकेला ऐसा राज्य है जहां वित्तीय दुर्व्यवहार को अलग से अपराध की श्रेणी में रखा गया है. दूसरे राज्यों में ये घरेलू हिंसा से जुड़े अपराध में ही आता है.
एसबीएस न्यूज़ से शेरलोट लैम की इस रिपोर्ट को आपके लिए पेश किया है एसबीएस हिंदी से गौरव वैष्णव ने.




