जहां एक ओर औकस संधि को अंतराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है, वहीं कुछ पड़ोसी देशों में इस संधि को लेकर चिंताएं भी हैं। यही नहीं, लेबर सरकार को पॉल कीटिंग जैसे अपने ही मार्गदर्शकों की भी कड़ी भर्तसना का सामना करना पड़ रहा है। क्या हैं यह चिंताएं, और क्यों नज़र आ रहा लेबर खेमा विभाजित, आइये जानें इस रिपोर्ट में।
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