मुख्य बिंदु
- गर्मी देने वाले उपकरण और धूम्रपान आग लगने के जोखिम के सामान्य कारण माने जाते हैं, लेकिन आग किसी भी गर्मी देने वाले स्त्रोत से लग सकती है।
- अग्निशील पदार्थों के आसपास विशेष सभी वषयक ध्यान देना आग से बचने की कुंजी है।
- बच्चों को घर में अग्नि सुरक्षा, बचाव और अग्नि आपातकाल प्रतिक्रिया के बारे में सिखाया जाना चाहिए।
कोई नहीं सोचता कि वे आग लगने की घटना का शिकार हो सकते हैं। हालांकि लगभग हर आग की घटना होने से रोकी जा सकती है, लेकिन एक बार आग फैल जाए तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।
खतरों की जानकारी और उन्हें टालने के उपायों की समझ जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकती है।
2019 में आया नेचुरल हैज़ार्डस रिसर्च ऑस्ट्रेलिया और फायर रेस्क्यू विक्टोरिया का संयुक्त शोध कहता है कि ऑस्ट्रेलिया भर में सालाना घरों में लगने वाली आग से होने वाली मृत्यु दर दूसरी किसी भी प्राकृतिक आपदा जिंसमें बाढ़, तूफ़ान और बुशफायर भी शामिल हैं, की संयुक्त मृत्यु दर से अधिक है।
नेचुरल हैज़ार्डस रिसर्च ऑस्ट्रेलिया के मुख्य सचिव और इस शोध के सह-लेखक एंड्रू जीसिंग का कहना है कि, “2003 से 2017 के बीच, 900 लोगों ने रोकी जा सकने वाली आग में अपनी जान गंवाई है।”

श्री जीसिंग समझाते हैं, “इस शोध का एक मुख्य बिंदु यह भी है कि जोखिम का केवल कोई एक प्रमुख कारण नहीं है।”
“जब हम घरों में लगने वाली उन आग के मामलों को देखते हैं जो टाली जा सकती थीं, हम यह पाते हैं कि इनके पीड़ित व्यक्तियों,उनके व्यवहारों और उनके परिवेश में कई समानताएं थीं।”
हालांकि, वे यह ज़रूर कहते हैं कि टाली जा सकने वाली आग के मामलों में ज़्यादातर कारण “सिगरेट, बिजली की गड़बड़ी, हीटर, या खुली आग” ही होते हैं।
बुनियादी गृह अग्नि सुरक्षा में सुचारु स्मोक अलार्म, एक अग्नि सोपान योजना, और बनते हुए खाने को अनिरीक्षित न छोड़ना शामिल हैं।
लेकिन क्वींसलैंड के अग्नि और आपातकालीन सेवा के सचिवीय प्रबंधक मार्क हालवर्सन कहते हैं कि बचाव शुरू होता है यह समझने से कि गर्माहट देने वाले स्त्रोतों के साथ क्या जोखिम जुड़े हैं, और उन्हीं के अनुसार प्रतिक्रिया तैयार करने से।

श्री हालवर्सन कहते हैं, “किसी भी आग के शुरू होने के लिए एक ऐसे गर्माहट के स्त्रोत की आवश्यकता होती है जो अग्निशील पदार्थ में आग लगा सके।”
“यह स्त्रोत कुछ भी हो सकता है, चाहे हमारे गर्मी देने वाले उपकरण हों, खाना पकाने के उपकरण हों या फिर वो बैटरी हों जिन्हें सही तरह से चार्ज न किया जा रहा हो।”

आग लगने का बचाव
शोध दिखाते हैं कि सबसे अधिक आग लगने की दुर्घटनाएं सर्दियों के महीनों में ही होती हैं। इसकी बड़ी वजह गर्माहट के स्त्रोतों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाना है।
श्री जीसिंग कहते हैं, “खुली आग या हीटर सर्दियों में आग लगने की बड़ी वजहें हैं। वे आग संबंधी मृत्यु जो टाली जा सकती हैं, सर्दियों के महीनों में ज़्यादा आम हैं।”
अग्नि अधिकारी लोगों से आग्रह करते हैं कि वे गर्माहट देने वाले उपकरणों का प्रयोग उत्पादक के सुझाये तरीके से ही करें। इसका अर्थ यह हुआ कि बाहर इस्तेमाल किये जाने वाले उपकरणों का प्रयोग, खासकर वे जिनमें हीट बीड्स या एलपीजी का प्रयोग होता हो, उन्हें घर के भीतर प्रयोग न किया जाए।
गर्माहट देने वाले उपकरण जो बाहर की परिस्थिति के लिए उपयुक्त होते हैं, उन्हें घर के भीतर नहीं इस्तेमाल करना चाहिए। इनसे घर में कार्बन मोनोऑक्साइड भर सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
हाल के सालों में, ऑस्ट्रेलिया भर में लीथीयम आयन बैटरी वाले उपकरणों, खासकर ई-स्कूटरों में आग लगने की घटनाएं बढ़ीं हैं।
“क्योंकि एक ई-स्कूटर की बैटरी में अधिक ऊर्जा होती है, अगर कहीं आग लग जाए, तो उसके फैलने की संभावना अधिक होती है,” श्री हालवर्सन समझाते हैं।
राज्य अग्निशमन दल के अनुसार, पिछले 18 महीनों में 450 से अधिक अग्नि की घटनाओं को लीथीयम आयन बैटरी से जुड़ा पाया गया है।
श्री हालवर्सन चेताते हैं, “सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग अपने उपकरणों के लिए गलत चार्जर का प्रयोग करते हैं।”
सिर्फ इसलिए कि आपका उपकरण एक बैटरी चार्जर से जुड़ जाता है, इसका अर्थ यह नहीं है कि वह आपके उपकरण के लिए सही चार्जर भी हो।मार्क हालवर्सन, सचिवीय प्रबंधक, अग्नि सुरक्षा, क्वींसलैंड अग्नि एवं आपातकालीन सेवा

ज्वलनशील और अग्निशील पदार्थ ज़्यादकर लोगों के घरों के पिछवाड़े में पाए जाते हैं। सूखी लकड़ियां, पुराने कपड़े, टिम्बर, और दूसरे उपकरण कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिनमें आसानी से आग लग सकती है। घरों में पाए जाने वाले दूसरे जोखिम भरे पदार्थों में सफाई करने वाले सामान, रसायन और पेंट हो सकते हैं।
श्री हालवर्सन कहते हैं कि जिन लोगों को किसी प्रकार का ईंधन, जैसे लॉन मोवर के लिए या दूसरेे प्रकार का ईंधन, घर पर रखने की आवश्यकता होती है, उन्हें ख्याल रखना चाहिए कि वे इसे सही डब्बों में रखें, दूसरे उपकरणों से दूर रखें और गर्मी या सीधी धूप से दूर रखें।
वे चेताते हैं, “ईंधन और उर्वरक साथ घातक हो सकते हैं।”
“घर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह ज़रूरी है कि अलग-अलग तरह के पदार्थ अलग-अलग रखे जाने चाहिए, और सही डब्बों में रखे जाने चाहिए।”

सुचारु स्मोक अलार्म भी घर की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
हालांकि वे आग लगने से तो नहीं रोक सकते, लेकिन वे लोगों को इतनी चेतावनी ज़रूर दे सकते हैं कि या तो वे खतरे से दूर निकल सकते हैं, या आग को शुरुआत में ही बुझा सकते हैं।
लेकिन श्री हालवर्सन का कहना है कि अग्नि को बिना तैयारी के बुझाने की कोशिश न करें।
“अगर लोगों को विश्वास न हो कि उनके पास सही अग्निशामक यंत्र हैं तो सबसे महत्वपूर्ण कदम यह होगा कि वे अपने परिवार और घर में रहने वाले दूसरे लोगों के साथ तुरंत बाहर चले जाएं, और ट्रिपल ज़ीरो पर फ़ोन कर स्थानीय अग्निशामक सेवा के लिए आग्रह करें।”

अग्नि सुरक्षा और बच्चे
65 वर्ष से अधिक की आयु के लोग और पांच वर्ष से काम आयु के बच्चे आग लगने की परिस्थिति में सबसे अधिक चोट लगने के खतरे में होते हैं।
सिडनी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल नेटवर्क में किड्स हेल्थ प्रमोशन यूनिट की प्रबंधक सिमोन सुलिवान कहती हैं कि बच्चे जलने को लेकर अधिक संवेदनशील होते हैं, फिर चाहे वे छोटी, आसानी से बुझ जाने वाली आग ही क्यों न हो।
“उनकी त्वचा वयस्कों की त्वचा से कोमल और पतली होती है... काम तापमान पर भी गहरे जलने के घाव तेज़ी से लग सकते हैं।”

बच्चों को घर पर अग्नि सुरक्षा सिखाना ट्रिपल ज़ीरो पर फ़ोन मिलाने की समझ से कहीं अधिक है। इसमें व्यावहारिक ज्ञान भी शामिल होना चाहिए।
सुश्री सुलीवान कहती हैं, “सबसे पहली चीज़ जो सिखाने की है वो यह, कि आग लगने की स्थिति में घर से निकलने की निकास योजना क्या है और इस योजना का परिवार के साथ अभ्यास किया जाना।”
“इस योजना को बहुत सरल बनाएं, ऐसा बनाएं जिसमें आपके बच्चे सम्मिलित हो सकें और उन्हें मज़ा भी आए। कोशिश करें कि आप व्यावहारिक तरीके से बच्चों को सिखाएं।”
वे यह भी सुझाती हैं कि आसान जुमलों के ज़रिये बच्चों को सिखाने से बच्चों को चीज़ें बेहतर याद रहती हैं।
“घर में आग लगने की परिस्थित में बच्चों को सिखाएं ‘गेट डाउन लो एंड गो, गो, गो!’ क्योंकि ज़मीन के नज़दीक हवा ठंडी और साफ़ होगी। और अगर उनके कपड़ों में आग पकड़ जाए तो उन्हें सिखाएं ‘स्टॉप, ड्राप, कवर एंड रोल’।”
ज़मीन पर लेट जाने से आग की लपटें चेहरे तक नहीं पहुंच पातीं, और चेहरे को हाथों से ढक लेने से भी चोट से बचा जा सकता है।

सुश्री सुलीवान कहती हैं कि अंत में बच्चों को अग्नि से बचाव के बारे में सिखाने का उद्देश्य यही है कि उनका डर काम किया जा सके और बातों से सिखाया जा सके।
“उन्हें समझाएं कि स्मोक अलार्म क्या करता है, कहां है, कैसा दिखता है, आग की परिस्थति में कैसी आवाज़ करता है और बैटरी कम होने पर क्या इशारा करता है।”
“ताकि अगर कभी आग लग भी जाए तो वे घबराएं नहीं क्योंकि उन्हें पूरी जानकारी है कि इस परिस्थित में उन्हें करना क्या है।”
अभिभावकों के लिए घर में अग्नि सुरक्षा के कुछ तरीके
- बच्चों के लिए अग्नि सुरक्षा अभ्यास
- रसोई में जलने से बचने के उपाय
- बच्चों के जलने की स्थिति में प्राथमिक उपचार – (इन सभी के अनुवाद नेपाली, सिम्प्लिफाइड चीनी, अरबी, फ़ारसी, हिंदी, कैरेन, पंजाबी, समोअन, वियतनामी में उपलब्ध हैं।)
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