Nominated for IABCA awards 2017, Prerna Pahwa came to Australia as a student. Now she is an inspiration to many. Founder of "Simply Human - Superheroes without Capes" organisation, Prerna works for cancer patients. She started with collecting small amounts at an individual level which was never easy.
प्रेरणा पाहवा नाम से प्रेरणा हैं, काम से प्रेरणा हैं और अंजाम से भी प्रेरणा हैं. वह ऐसा काम करती हैं, जिसमें अपने आपको होम कर देना होता है. प्रेरणा कैंसर मरीजों के लिए पैसा जमा करती हैं.
प्रेरणा बताती हैं कि उनकी बुआ की लड़की कैंसर की मरीज थी और अपने इलाज के लिए उसने कैसे पाई-पाई खुद जोड़ी. और इस संघर्ष के बाद एक दिन प्रेरणा की बहन चल बसीं. यह हादसा उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदलने के लिए काफी था. उस दिन के बाद वह कैंसर मरीजों के लिए काम करने में जुट गईं. और पहले ही अभियान से पता चला कि राह बहुत कठिन होने वाली है.
भारत के छत्तीसगढ़ में रायगढ़ की रहने वालीं प्रेरणा एक स्टूडेंट के तौर पर ऑस्ट्रेलिया आई थीं और फिर रोजगार के लिए ब्रिसबेन चली गईं. वहां एक दोस्त के जरिए उन्हें उज्ज्वल नाम के एक नेपाली युवक के बारे में पता चला जिसे 22 साल की उम्र में बोन मैरो कैंसर हो गया था. प्रेरणा उससे मिलने अस्पताल पहुंचीं. वह बताती हैं, "उसके शरीर पर कैंसर का असर दिखने लगा था. उसमें बहुत से बदलाव आ चुके थे."
उज्ज्वल को इलाज के लिए करीब एक लाख डॉलर की जरूरत थी. प्रेरणा ने पैसे जमा करना शुरू किया. वह बताती हैं, "मैं डिब्बा ले कर इवेंट्स में जाती थी. लोगों से कहती थी कि एक, दो, पांच डॉलर जो भी आप देना चाहें दें."
लोगों से यूं पैसे मांगना कोई आसान काम नहीं होता. प्रेरणा बताती हैं, "लोगों को लगता था कि मेरा अपना कोई स्वार्थ होगा. बहुत से लोग कहते थे कि यह कोई स्कैम है. बहुत से लोग सलाह देते थे कि अपना पिंड छुड़ाओ."
लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद प्रेरणा लगी रहीं. एक के बाद एक करके बहुत से ऐसे मरीजों के लिए पैसे जमा करती रहीं जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे. अब उन्होंने अपनी एक संस्था "सिंपली ह्यूमन" बना ली है. और अब प्रेरणा दूसरों को प्रेरित भी कर रही हैं. उन्हें 2017 के ऑस्ट्रेलिया-इंडिया बिजनस ऐंड कम्यूनिटी अवॉर्ड्स के लिए नामित किया गया है.
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