भारत के अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट है कि गुजरात में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस किताब की बिक्री पर रोक लगाने की एक याचिका दायर हुई थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया. इस किताब में कथित तौर पर आरोप लगाया गया है कि मोदी ने अपने वादे पूरे नहीं किए.
इस किताब पर बैन के लिए पहले भी कई याचिकाएं दायर हो चुकी हैं लेकिन सभी को खारिज कर दिया गया था. इस बार 69 साल के नागिनदास दोशी ने एडवोकेट मनोज धानक के ज़रिए याचिका दायर की थी.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक याचिका में कहा गया था कि यह किताब भारत के सबसे प्रतिष्ठित पद पर बैठे व्यक्ति पर सीधा हमला है जिसके ज़रिए प्रधानमंत्री पर अपमानजनक टिप्पणी की गई है. धनक अब इस बारे में जनहित याचिका दायर करेंगे.
पहले भी जो याचिकाएं निचली अदालतों और हाई कोर्ट में दाखिल की गई थीं उन्हें अदालतों ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि किताब मोदी की छवि को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती. यह किताब एक कांग्रेस कार्यकर्ता जयेश शाह ने लिखी है. मूल रूप से गुजराती में लिखी गई इस किताब का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया गया है.
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