बेंगलुरु पश्चिम में रहने वालीं गौरी लंकेश एक साप्ताहिक टैबलॉयड 'लंकेश पत्रिके' चलाती थीं. पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम जब वह अपने घर पहुंचीं तो एक अज्ञात हमलावर ने उन पर करीब से गोलियां चला दीँ. कुल सात गोलियां चलाईं जिनमें से चार उन्हें लगीं.
पुलिस ने बताया कि गोलियों की आवाज को पटाखों की आवाज समझकर पड़ोसी जब घर से बाहर आए तो उन्हें देखा कि गौरी लंकेश खून से लथपथ अपने घर के बाहर पड़ी हैं.
गौरी के दोस्त और पत्रकार शिवसुंदर ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया कि गौरी को लगातार धमकियां मिल रही थीं. अखबार के मुताबिक शिवसुंदर ने बताया, "अगर आप गौरी की सोशल मीडिया प्रोफाइल देखो तो वहां कट्टर दक्षिणपंथी लगातार धमकियां दे रहे थे. वह ताउम्र दक्षिणपंथी ताकतों का विरोध करती रहीं."
गौरी अपने सख्त दक्षिणपंथ-विरोधी रवैये के लिए मशहूर थीं. उनकी हत्या को बहुत से लोग 2015 में कर्नाटक में ही हुई एमएम कलबुर्गी की हत्या से जोड़कर देख रहे हैं. कलबुर्गी भी कट्टर दक्षिणपंथी ताकतों के विरोधी थे.
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