मेलबर्न के मशहूर टोंका रेस्तरां में तंदूर एक्सपर्ट सुंदर एसबीएस शेफलाइन के सितारे हैं. लगभग तीन दशक से खाना बना रहे सुंदर अब ऐसे मुकाम पर हैं जहां वह प्रयोग करते हैं. इंडियन में थोड़ा सा चाइनीज का तड़का लगाकर कुछ नया बना देते हैं तो कभी ऑस्ट्रेलियन में मुगलई मिलाकर कुछ नया रच देते हैं. वह कहते हैं, "एक्सपेरिमेंट करना अच्छा लगता है. कुछ नया निकलता है तो ताजगी बनी रहती है, खाने में भी और बनाने में भी."
सुंदर ने खाने की दुनिया का सफर शुरू किया था 90 के दशक में देहरादून के एक छोटे से रेस्तरां से. वहां वह सहयोगी के तौर पर काम कर रहे थे लेकिन उनके हाथ में हुनर था तो वहां से पंजाब एक रेस्तरां मालिक उन्हें अपने साथ ले गए. पंजाब में कुछ साल रहे और फिर मुंबई चले गए. लेकिन खुश्बू का तो स्वभाव ही होता है फैलना. वह एक जगह टिक कर कहां रह पाती है. तो सुंदर स्किल्ड वीसा पर स्पॉन्सरशिप पाकर यहां ऑस्ट्रेलिया आ गए.
और अपने साथ लाए विशाल-विस्तृत अनुभव. वह खाने की नब्ज जानते हैं. वह कहते हैं, "हम चाइनीज खाने को भी इंडियन स्टाइल में बना लेते हैं. डिश का नाम वही रहता है लेकिन स्वाद इंडियन हो जाता है, तो वो भारतीयों को भी अच्छा लगता है और ऑस्ट्रेलियाई लोगों को भी. इस तरह हम दोनों स्वाद के चाहने वालों तक पहुंच पाते हैं."
सुंदर बताते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई लोगों को हमारा खाना बहुत पसंद हैं क्योंकि वे दुनिया घूमते हैं और नई नई चीजें ट्राई करते हैं. खुद उन्हें भारतीय खाना ज्यादा पसंद है. वह कहते हैं, "हम भारतीयों को खाना तब तक नहीं भाता जब तक कि वह पूरी तरह पका ना हो और उसमें मसाले रम ना गए हों. मैं भले ही विदेशियों के लिए खाना बनाता हूं लेकिन मेरा स्वाद आज भी वही है, खालिस भारतीय." सुंदर को अपनी पत्नी के हाथ का खाना बहुत पसंद है. हालांकि उनकी पत्नी शुद्ध शाकाहारी हैं और सुंदर मांस पकाते ही नहीं खाना भी पसंद करते हैं. लेकिन पत्नी के हाथ के खाने से ज्यादा नहीं. उनके बच्चों को भी पापा के बजाय मां के हाथ के खाने की ज्यादा चाह होती है.
