कार्लिंगफर्ड के कम्यूनिटी सेंटर में अनोखा समा बंधा था. बहुत सारी महिलाएं थीं. बहुत सारी. ज्यादातर भारतीय लेकिन विदेशी भी बहुत थीं. जमा हुई थीं चाय पीने के लिए. साथ में थे खांटी देसी भारतीय खाने. लेकिन अंदाजा था विदेशी.
रचना भाटिया, मानसी खन्ना भाटिया, दीप्ति बावेजा और गीतिका भार्गव ने यह अनोखा आयोजन किया था.

और मकसद था भारतीय संस्कृति को विदेशी रंग-ढंग में मिलाकर एक संगम बनाना. जैसा कि रचना भाटिया ने बताया, "विदेशों में हाई टी खाने के बाद या कुछ पहले पी जाने वाली चाय को कहते हैं लेकिन यह कॉन्सेप्ट हमारे यहां बहुत पुराना है जिसे अल्पाहार कहा जाता है. तो हमने सोचा कि इन दोनों को मिलाकर कुछ नया किया जाए."

और नतीजे में निकली एक खूबसूरत शाम जहां खाना-पीना, गाना-बजाना, हंसान-हंसाना तो था ही, साथ ही एक मकसद था उन महिलाओं की मदद करना जो घरेलू हिंसा की शिकार हैं. इस आयोजन के दौरान ऑक्शन के जरिए लीजा हरमन फाउंडेशन के लिए पैसे जमा किये गए. लीजा हरमन फाउंडेशन घरेलू हिंसा से पीड़िता महिलाओं के लिए काम करती है.

