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Australian army is looking for people like you

Lt. Cdr. Amarjit Bhandal (left) came from India as a student.

Lt. Cdr. Amarjit Bhandal (left) came from India as a student. Source: Vivek Asri/SBS

The Australian Defence Force has launched a new campaign to attract youngesters from multicultural backgrounds. Some Indian-Australians are stars of this campaign.


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By Vivek Asri

Source: SBS



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The Australian Defence Force has launched a new campaign to attract youngesters from multicultural backgrounds. Some Indian-Australians are stars of this campaign.


ऑस्ट्रेलिया की सेना को बहुसांस्कृतिक लोगों की तलाश है. अधिकारी और सरकार चाहते हैं कि ज्यादा से आप्रवासी युवा सेना में भर्ती हों. इसके लिए एक अभियान शुरू किया गया है जिसके तहत सेना में भर्ती विदेशी मूल के लोगों की कहानियां कहते विज्ञापन बनाए गए हैं. इनमें कुछ भारतीय मूल के लोग भी हैं. पेश है एक रिपोर्ट...

ऑस्ट्रेलिया की नौसेना में अफसर हैं. उनके सैन्य साथी उन्हें सेना का स्टार बताते हैं. उनकी कहानी को ऑस्ट्रेलिया के और ज्यादा आप्रवासी युवाओं को दिखाया जा रहा है ताकि और ज्यादा बहु सांस्कृतिक लोगों को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया जा सके. इसके लिए ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स ने एडीएफ सरप्राइज्ड अस नाम का अभियान शुरू किया है. ऑस्ट्रेलिया के सेना अध्यक्ष मार्शल मार्क बिन्सकिन कहत हैं कि बहुत जरूरी है कि देश की सेना बहुसांस्कृति समाज का प्रतिबिंब हो. उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे पास सर्वोत्तम क्षमता हो. हमारी क्षमता हमारे लोग हैं. और हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम ऑस्ट्रेलिया की सारी आबादी से लोग लें.”

फिलहाल ऑस्ट्रेलिया की सेना में हर चौथा व्यक्ति बहुसांस्कृतिक समाज से आता है. एडीएफ की कोशिश है कि ज्यादा लोगों को आकर्षित किया जा सके. इसलिए चंद ऐसे चेहरों को चुना गया है जो आप्रवासियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और सेना में सफल करियर बना चुके हैं. ऐसे ही एक सफल ऑस्ट्रेलियाई सैन्य अफसर लेफ्टिनेंट कमांडर अमरजीत भंडाल हैं जो इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करके सेना में भर्ती हुए थे. वह बताते हैं, “मैं पढ़ने आया था तो मेरे साथ कुछ स्टूडेंट्स थे जो पहले से सेना में थे. वे लोग भर्ती होने के बाद आगे पढ़ने आए थे. उन्होंने मुझे प्रेरित किया और मैं भी सेना में भर्ती हो गया.”

अभियान के तहत कुछ वीडियो बनाए गए हैं जिन्हें अलग अलग माध्यमों से प्रसारित किया जाएगा. इस अभियान के तहत आप्रवासी माता-पिता को भी  प्रेरित किये जाने की कोशिश की जा रही है कि वे अपने बच्चों को सेना में भेजें.


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