भारतीय युवा वैज्ञानिक का डिमेंशिया के मरीज़ों को रोबोटिक उपहार

Source: SBS
रोबोट ही भविष्य हैं.. ये शब्द हैं भारत में जन्में एक युवा रोबोट विज्ञानी के.. जो कि सितंबर में ही विश्व के शीर्ष विज्ञानियों के साथ एक मीटिंग में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करेंगे ऑस्ट्रेलिया में पीएचडी के छात्र शिव लीला कृष्ण चंद गुडी को ऑस्ट्रेलियन एकेडमी ऑफ साइंस ने फैलोशिप के लिए चुना है. वो इसी महीने की 23 से 28 तारीख के बीच छठे हेडेलबर्ग लॉरेट फोरम में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करेंगे. हेबेनारो नाम के इस रोबोट को इंसानों से वार्तालाप के लिए तैयार किया गया है. ये किसी आवाज़ की पहचान सकता है और उसका जवाब दे सकता है साथ ही ये किसी चीज़ या चेहरे को भी पहचान सकता है और महसूस भी कर सकता है. कृष्ण चंद अब तक 4 पेटेंट रिजस्टर करवा चुके हैं जबकि उन्होंने डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के लिए बनाई गई उनकी स्मार्ट वॉच के पेटेंट के लिए भी आवेदन किया है. वो कहते हैं कि गिरने के कारण लगने वाली चोट से बचाने के लिए इसमें फॉल डिटैक्शन सेंसर लगाए गए हैं जो कि एयर बैग को एक्टिव होने का संकेत देते हैं.
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