सिडनी के इतिहास को खोजने निकलेंगे तो आपको 50 हजार साल पुराने निशान भी मिल जाएंगे. क्योंकि यूरोपीय लोगों के आने से पहले से ही लोग यहां बसे थे. और उनके निशान चट्टानों पर, धरती पर और समुद्र में भी मिल सकते हैं. लेकिन 1770 में इस शहर पर पहली बार उस दुनिया के कदम पड़े जो बाहर करवटें ले रही थी. 1770 में जेम्स कुक सिडनी पहुंचे और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया एकदम बदल गया.
जेम्स कुक ने ऑस्ट्रेलिया के ईस्ट कोस्ट पर ब्रिटिश झंडा गाड़ा और उसके 18 साल बाद कैप्टन आर्थर फिलिप 11 जहाजों का बेड़ा लेकर 26 जनवरी 1788 को उस जगह पहुंचे जिसे पोस्ट जैक्सन कहा गया. लेकिन इन लोगों के यहां आने का मकसद कोई शहर बसाना नहीं बल्कि जेल बनाना था. ब्रिटेन में सजा पाए लोगों के लिए. इसिलिए सिडनी के शुरुआती बाशिंदे थे सैनिक और कैदी. उन्हें जितना पता था, उसके हिसाब से उन्होंने शहर बसाना शुरू किया. उन्होंने स्थानीय लोगों के कौशल और जानकारी को नजरअंदाज किया. और नतीजा ये हुआ कि उनके सामने मुश्किलों के पहाड़ खड़े होते गए. कई बार तो भूखे मरने की भी नौबत आई.

नए अधिकारी ज्यादातर शहर के पूर्वी हिस्से में रहे. इसलिए इस हिस्से में आज भी आप प्राचीन इमारतें देख सकते हैं जैसे तब सरकारी दफ्तर, गवर्नर का निवास और संसद वगैरह. पश्चिम हिस्से में कैदियों को रखा गया. उन्होंने जहां तहां, जैसे कैसे अपने रहने लायक जगह बनाईं. पश्चिमी हिस्से को बसाने में सबसे ज्यादा ध्यान गवर्नर लैकलैन मक्वायरी के कार्यकाल में यानी 1810 से 1821 के बीच दिया गया. मैक्वॉयरी एक विजनरी थे. वह शहर बनाना चाहते थे. लेकिन उन्हें लंदन वापस बुला लिया गया और उन पर बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने का आरोप लगा.
लेकिन शहर पैसों से नहीं बनता. वक्त से बनता है. वक्त बीत रहा था और सिडनी बनता जा रहा था. और ज्यादा लोग यहां आने लगे. धीरे धीरे चर्च, स्कूल, बाजार, दुकानें और एक अर्थव्यवस्था खड़ी होने लगी. एक लाइब्रेरी भी बनी. फिर उद्योग धंधे खड़े हो गए. 1840 में ब्रिटेन से कैदियों का आना बंद हो गया.

1842 में एक स्वतंत्र सिडनी शहर की स्थापना हुई जहां चुनाव होते थे, दफ्तर थे और आजाद मुआशरे के सारे निशान मौजूद थे. लेकिन सिडनी के इतिहास का सुनहरी पन्ना खुलता है 1851 में जब सोना मिला. फिर तो यूरोप, अमेरिका और चीन से जहाज के जहाज भरकर लोग आने लगे. इतिहास की किताबों में यह वक्त एक दीवानावार वक्त के रूप में दर्ज है जब सोना बह रहा था, शराब बह रही थी, पार्टियां हो रही थीं. जश्न मन रहे थे.
उस दौर की समृद्धि का असर सिडनी के आर्किटेक्चर पर देखा जा सकता है जबकि विक्टोरिया अंदाज की इमारतें बनीं. टाउन हॉल, जनरल पोस्ट ऑफिस वगैरह उसी दौर की देन हैं. 19वीं सदी के आखिर तक आते आते सिडनी पश्चिमी दुनिया के सबसे बड़े शहरों में शुमार हो चुका था. इसकी जनसंख्या आधे मिलयिन तक पहुंच चुकी थी. और तब से शहर लगातार बड़ा होता जा रहा है.
