नमस्कार, आप सुन रहे हैं SBS Hindi और मैं
हूं ज्योतिका। आज हम बात करेंगे एक बहुत ही
दिलचस्प और स्वास्थ्य से जुड़े विषय पर।
गर्म और ठंडी तासीर वाले भोजन। हमारे
खान-पान का असर सिर्फ स्वाद या भूख पर ही
नहीं बल्कि हमारे शरीर की ऊर्जा, पाचन और
रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी पड़ता है।
आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ने
खाने की तासीर यानी गर्म और ठंडी प्रकृति को
बहुत महत्व दिया है। इस प्रस्तुति में हम
जानेंगे कि कौन से खाद्य पदार्थ हमारी सेहत
के लिए कैसे काम करते हैं और क्या ठंडे गर्म
तासीर के भोजन का कोई असर है भी या नहीं।
इसी पर बात करने के लिए हमारे साथ जुड़ी हैं
Accredited Practising Dietitian नेहा
भाटिया। तो चलिए शुरू करते हैं बातचीत के
सफर को और समझते हैं गर्म और ठंडी तासीर
नेहा SBS Hindi के साथ बातचीत करने के लिए
आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।
-धन्यवाद।
-नेहा सबसे पहले तो जानना चाहेंगे गर्म और
ठंडी तासीर वाले भोजन की जो अवधारणा है वो
क्या है? क्या इसका वैज्ञानिक आधार है? इसका
-मतलब क्या समझे?
-अगर बात कीजिए ठंडे और गर्म खाने की तो और
अगर इसके दो पहलू हैं। पहला पहलू तो है
cultural value कि हमारे specially भारत या
subcontinent में यह बातें बहुत होती हैं
खाने को लेकर कि कुछ खानों को
अ कुछ समय के accordingly खाना चाहिए और
गर्म खाने को ठंडे के ऊपर नहीं खाना चाहिए।
ठंडे को गर्म के ऊपर नहीं खाना चाहिए। तो यह
जो बातें हैं यह खाने से related सीमित
में है और उसका link जो है वह मौसम के वजह
से भी बहुत फर्क
पड़ता है। अ वहां के मौसम काफी different
होते हैं according to अलग-अलग
जगहों के। इसमें scientific nutritional
ज्यादा value नहीं होती क्योंकि अगर आप
अंतरराष्ट्रीय evidence को देखें तो ऐसा कोई
evidence नहीं है जिसमें बोला जाए कि कुछ
खानों को आप नहीं खा सकते अगर उनका
temperature ठंडा है या गर्म है। तो यह
चीजें अगर मैं बोलूं तो यह subcontinent में
ज्यादा valid है और
इनकी cultural value significance ज्यादा है
ना कि scientific evidence. If
-अगर मैं उसको समझा पाऊं तो।
-Right. तो नेहा इस तरह के कुछ examples आप
दे सकती हैं कि कौन-कौन से जो खाद्य पदार्थ
आमतौर पर गर्म तासीर के माने जाते हैं या
फिर ठंडे तासीर के माने जाते हैं?
तो अगर आप nutritionally लें तो गर्म और
ठंडे तासीर होती है किसी भी खाने की। उसकी अ
उसकी biology या उस किस खदान से वो बना है,
किस mineral से वो बना है। So अगर मैं आपको
you know examples दूं तो इसमें अगर आप फल
या अ फल या सब्जियों को लें तो
सब्जियों में कुछ ऐसी जैसे सब्जियां होती
हैं अ जिनको digestion करने में थोड़ा time
ज्यादा लगता है तो उन-उनको आप बोल सकते हो
कि उनकी गर्म थोड़ी तासीर होती है। अ कुछ
ऐसी चीजें जो सिर्फ जैसे मैंने पहले बोला
subcontinent में खाई जाती हैं जो कि
carbohydrates के through आती हैं। अ जैसे
दलिया हो गया,
wheat हो गए, अलग-अलग तरीके के दालें हो गई,
उनकी तासीर थोड़ी गर्म हो सकती है क्योंकि
उनको पकाया भी अ बहुत ज्यादा temperature पर
जाया जाता है और उनको बहुत लंबा भी पकाने
की जरूरत होती है। तो जब तक जब हम उनको खाते
हैं तो वो हमारे system में थोड़ा लंबा
चलते हैं और digestion में लंबा समय लेते
हैं। तो अगर आप यह बात समझें कि कोई चीज जो
आप खा रहे हैं जिसको बहुत लंबे time तक आपकी
body को process करना पड़ता है, वो आपके
system में बहुत लंबे time तक रहती है। तो
पहले जमाने में यह बोला करते थे कि कुछ time
देना चाहिए, कुछ time gap होना चाहिए ताकि
वो वाले खाने पहले body उसको digest कर सके।
इससे पहले कि आप दूसरी चीजें खा पाएं। अ
मेरे ख्याल से यह चीजें थोड़ी सी confuse हो
चुकी हैं culture में कि अब बोला जाता है
कि गर्म चाय के ऊपर अ खरबूजा ना खाएं। उससे
आपकी तबीयत खराब हो सकती है क्योंकि वो फिर
ठंडा फल और गर्म चाय का combination खराब हो
सकता है। मगर अगर scientifically देखें तो
ऐसी कोई भी scientific research या evidence
नहीं है जिसमें बोला जाए कि यह खाने से
किसी की तबीयत खराब हो सकती है। In fact अगर
आप दुनिया के दूसरे देशों में देखें तो
वहां पर ज्यादातर supper का time जो कि खाने
के बा-बाद होता है रात के, उसमें
ठंडी या गर्म चीजों का सेवन होता है। गर्म
चीजों या ठंडी चीजों के बाद। अगर मैं आपको
example दूं Italy जैसे राष्ट्र में पहले
pasta खाया जाता है रात को जो कि काफी देर
तक digestion अ process चलता है body में और
वो गर्म होता है, b-body को गर्म रखता है,
गर्म sauces में बना होता है, टमाटर की
gravy या cream के साथ बना होता है। उसके एक
घंटे बाद ही जब supper time होता है तो लोग
अ गर्म चाय या coffee पीना पसंद करते हैं।
अ या कुछ लोग actually juice या wine भी
पीते हैं। तो अगर इसमें अगर आप
international evidence देखें तोकोई फर्क
नहीं पड़ता है कि ठंडा आप खाना खा रहे हैं
गर्म के बाद या गर्म खाएं ठंडे के बाद। पर
जैसे कि मैंने पहले बोला कि भारतीय जनता या
sub continent जनता culturally काफी
influenced होती है चीजों से और कई चीजें
superstitious भी होती हैं तो उन चीजों को
अगर हम ना देखें, nutritional value को
ज्यादा consider करें और evidence based
चीजों के ऊपर ज्यादा मानें तो ऐसा ठंडा और
गर्म तासीर की चीजों के बीच में कोई
difference नहीं है।
जी नेहा जी, यह तो हमने बात की तासीर की। अब
अगर temperature की बात करें।
दौड़ती भागती जिंदगी में हम बहुत बार ठंडे
भोजन का सेवन भी करते हैं क्योंकि option
नहीं होता। जैसे एक ठंडा sandwich या ठंडा
salad तो हम लेकिन हम जिस जिन देशों से आते
हैं, जिस तरह से आपने जिक्र किया culturally
हम connected हैं गर्म खाने के साथ तो किस
तरह से हमारी सेहत पर गर्म और ठंडे खाने का
असर पड़ता है और आगे चलकर क्या हमारे
स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ समस्याएं इससे आने
का अंदेशा रहता है?
भारत जैसे देश में ज्यादातर गर्म चीजों का
सेवन ज्यादा होता है और मौसम से भी related
काफी चीजें होती हैं कि अगर ठंड का मौसम है
तो लोग गर्म चीजें ज्यादा खानी पसंद करेंगे
और ठंड के मौसम में भी लोग ज्यादातर avoid
करते हैं ठंडी चीजें खाना। अब यह थोड़ा
superstitious भी है वहां पर कि अगर ठंड के
मौसम में आप ठंडी चीजें खाएंगे तो आपको
बीमारियां ज्यादा होंगी। जबकि अगर आप
evidence उठा के देखें तो ऐसा कुछ नहीं है।
बहुत ऐसे देश हैं अंतरराष्ट्रीय world में
जहां पर ठंडी सेवन का, ठंडी चीजों का सेवन
ठंड में किया जाता है। आप for example
कोरिया या जापान जैसी जगह उठा लें जहां पर
sushi जो mainly उनकी main diet है, जिसमें
fish या कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो ठंडी
प्रकार से preserve की जाती हैं, वो बर्फ के
महीनों में आराम से खाई जाती हैं। इनका
मतलब यह नहीं है कि वहां के लोग actually
उससे बीमार होते हैं। On the contrary क्या
होता है कि उससे immunity ज्यादा बढ़ती है।
अगर आप sub continent में देखें तो अगर आप
खान पान या सेवन की आदतों को देखेंगे तो
वहां पर actually ऐसा बहुत बार होता है
कि ठंडी चीजें जो हैं वो ठंड में खाई जाती
हैं। जैसे ठंडी खीर। अगर आप हिमाचल में
जाएं, पहाड़ों में जाएं तो ठंड में भी ठंडी
खीर वहां खाई जाती है। जैसे मैंने बोला
कि बहुत सारी चीजें influence करती हैं भारत
और sub continent के खाने पदार्थों में।
But ऐसा कोई evidence नहीं है कि आप ठंडा
खाना
खाएंगे तो बीमार हो जाएंगे। ठंडा खाना ठंड
में खाएंगे तो बीमार हो जाएंगे। हां, मगर
आजकल जो evidence, जो नई research आई है वो
यह जरूर कहती है कि बहुत गर्म खाना खाने से
आपकी bowel या gastric lining पर effect पड़
सकता है। तो यह तो सभी बहुत अच्छे से जानते
हैं कि बहुत ज्यादा गर्म खाना या बहुत
ज्यादा ठंडा खाना आपके मुंह के दांतों या
dental पे काफी असर पड़ता है। तो मेरा मानना
यह है कि खाने का temperature neutral होना
चाहिए। बहुत गर्म या बहुत ठंडा नहीं होना
चाहिए। जरूरी बात यह है कि जब खाने को बनाया
जाए, उसके सही temperature पर उसको बनाया
जाए। मगर जब उसका सेवन किया जाए तो वह
-neutral temperature पर होना चाहिए।
-नेहा जी, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जहां
पर अगर young लोगों की बात करें, जिनके पास
खुद खाना बनाने का वक्त नहीं है या फिर वह
जो ज्यादातर बाहर के खाने पर depend होते
हैं। क्या सलाह आप उन्हें देना चाहती हैं?
अगर वह अपने स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखें
और
खाने के temperature की अगर बात की जाए या
खाने की तासीर की बात की जाए तो किस तरह से
आप उन्हें क्या सलाह देना चाहती हैं?
देखिए as a food professional या dietician
और even as a mother
मैं तो usually यही सबको advice करती हूं कि
जितना हो सके घर में खाना बनाएं। अपने
हाथों से बनाएं, क्योंकि आपको पता है कि आप
उस खाने में क्या डाल रहे हैं। हम काफी
lucky हैं कि हम ऑस्ट्रेलिया जैसी country
में रहते हैं जहां पर food standards और जो
guidelines हैं काफी सख्त हैं। Food
labeling भी काफी सख्त है तो जो ingredients
हमारी super markets में मिलते हैं वो काफी
scrutinized होकर आते हैं और काफी उनकी
investigation होती है। तो और बहुत अलग अलग
तरीके के ingredients available हैं। ठीक
है, खाना बनाने के time आपको समय शायद
ज्यादा लग सकता है। अगर किसी के पास समय की
कमी नहीं है तो उसको जरूर ज्यादा से ज्यादा
खाना घर पर बनाना चाहिए। घर के खाने का सेवन
करना चाहिए। आजकल तो बहुत ही अलग अलग तरीके
की recipes, recipe books आ गई हैं, जिसमें
quick 20 minute recipes होती हैं, healthy
recipes भी होती हैं। उनको follow किया
जाए। मगर अगर किसी के पास बिल्कुल भी समय
नहीं है तो आजकल pre packaged meals,
nutritious meals भी बहुत super market में
मिलते हैं। उनको खरीद के गर्म करने में और
खाने में कोई खराबी नहीं है। वो भी काफी
nutritious होते हैं।
नेहा भाटिया जी, आपने SBS हिंदी के साथ अपने
विचार बांटे और हमें खान पान को लेकर बहुत
सारी अच्छी अच्छी जानकारी दी। बहुत बहुत
शुक्रिया आपका अपना वक्त हमारे साथ बांटने
-के लिए।
-Thank you ज्योति का।
इस अंश में प्रस्तुत किए गए विचार व्यक्तिगत
हैं। इससे SBS ना तो सहमत है ना ही असहमत।
आप अपनी स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ से
संपर्क कर सकते
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