Massive job cuts in IT industry is making headlines in India. Experts say that over 200,000 jobs will disappear every year for the coming three years. What is the truth?
पिछले हफ्ते भारत के अखबारों की हेडलाइंस डराने वाली थीं. ‘आईटी सेक्टर में हाहाकार’. ‘लाखों नौकरियों पर लटकी तलवार’ जैसी ये हेडलाइंस बता रही हैं कि भारत में बड़ी... बहुत बड़ी संख्या में नौकरियां जा रही हैं और जाने वाली हैं. यह बड़ी संख्या, सैकड़ों हजारों में नहीं बल्कि लाखों में है. करियर कंपनी जॉबहंटर्स इंडिया के संस्थापक लक्ष्मीकांत कहते हैं कि ये खबरें सच्ची हैं. वह बताते हैं, “मैं बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कहना चाहता लेकिन हर साल डेढ़ से दो लाख नौकरियां जाएंगी. लोगों को घर जाने को कहा जाएगा और यह शुरू हो गया है.”
इस कथित संकट पर बात तब शुरू हुई जब खबर आई कि अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनी कॉग्निजेंट भारत में हजारों लोगों को नौकरी से निकाल रही है. कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या छह हजार थी तो दूसरी रिपोर्ट्स ने 10 हजार लोगों को नौकरी से निकाले जाने की भी बात की. हालांकि कॉग्निजेंट ने कहा कि यह तो एन्युअल अप्रेजल का हिस्सा है और ऐसा तो हम हर साल करते हैं. लेकिन निकाले गए कर्मचारियों का कहना है कि इस बार जो हो रहा है, वह पहले से अलग है. फोरम फॉर आईटी इंपलॉयीज की उपाध्यक्ष वसुमति कहती हैं कि यह पूरी तरह अनैतिक है. वह कहती हैं, “पहली बात तो, हर साल हो रहा है तो यह सही नहीं हो जाता कि आप गलत तरीके से लोगों को नौकरी से निकाल दो. दूसरी बात ये है कि अब तक जब भी लोग हटाए जाते थे तो उनकी संख्या कम होती थी और उन्हें तुरंत कोई और नौकरी मिल जाती थी. इस बार हाल ही में बहुत बड़ी संख्या में लोग निकाले गए हैं. मसलन कॉग्निजेंट में अब तक अप्रेजल के दौरान फोर्थ ब्रैकेट रेटिंग नहीं होती थी. लेकिन इस साल से अचानक यह रेटिंग लागू कर दी गई और लोगों को जबरन इस ब्रैकेट में डाला गया.”
और सिर्फ कॉग्निजेंट में ही ऐसा नहीं हो रहा है. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट है कि विप्रो ने छह सौ लोगों को घर जाने को बोल दिया है और यह संख्या दो हजार तक बढ़ सकती है. टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार की रिपोर्ट है कि जिस तादाद में नौकरियां जाने की बात भारत में हो रही है, वैसा तो 2008-09 की मंदी के वक्त भी नहीं हुआ था. और लक्ष्मीकांत इस बात की ताकीद करते हैं, क्योंकि उनके पास इसकी वजह भी है. वह कहते हैं, “देखिए, आईटी इंडस्ट्री में आज चार मिलियन नौकरिया हैं. इंडस्ट्री 5-6 फीसदी की दर से बढ़ रही है. और साथ ही ऑटोमेशन भी हो रहा है क्योंकि कंपनियां अपना खर्चा कम करना चाहती हैं. आप आईटी कंपनियों को देखें तो वहां 60-65 फीसदी खर्चा तो तन्ख्वाह और लोगों से जुड़े दूसरी चीजों पर होता है. तो अगर वे दो पर्सेंट लोगों को भी निकाल देंगे तो काफी पैसा बचा लेंगे.”
वैसे, कई कंपनियों ने इन खबरों का खंडन किया है. इन्फोसिस और विप्रो के अलावा आईटी उद्योगपतियों की संस्था नैसकॉम ने तो बाकायदा बयान जारी कर रहा है कि ये खबरें गलत हैं और आईटी इंडस्ट्री तो हर साल डेढ़ लाख लोगों को नौकरियां देती रहेगी.
लेकिन एक से ज्यादा रिपोर्ट्स हैं जो कह रही हैं कि नौकरियों पर तलवार लटक रही है. पहले फरवरी में मैकिन्जी की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया कि भारत में 30 से 50 फीसदी आईटी वर्कर्स ऐसे हैं जो नए स्टैंडर्ड्स पर खरे नहीं उतरते और उन्हें दोबारा ट्रेन करना होगा. जापाना की ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने अपने एक रिसर्च नोट में कहा था कि इन्फोसिस, कॉग्निजेंट, टेक महिंद्रा और विप्रो में कुल कर्मचारियों में दो से तीन फीसदी की नौकरी जाएगी. आमतौर पर सालाना एक से डेढ़ फीसदी लोग हटाए जाते हैं.
जाहिर है इन खबरों पर यकीन नहीं होता क्योंकि लोग तो यही सुन पढ़ रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकॉनमी है. कि जीडीपी ग्रोथ तो बहुत ज्यादा है. लेकिन जानकार दूसरे पहलू को नजरअंदाज नहीं करना चाहते. इकनॉमिक ऐंड पॉलिटिकल वीकली के संपादक प्रंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं, “पिछले 10-15 साल में भारत की इकॉनमी और जीडीपी तो बहुत तेज गति से बढ़ी है लेकिन नौकरियां पैदा नहीं हो रहीं. 2004 से 2014 के बीच जब यूपीए की सरकार थी तब भी जीडीपी बहुत ज्यादा था लेकिन आलोचक कहते थे कि इस ज्यादा जीडीपी का क्या फायदा जबकि नौकरियां नहीं पैदा हो रहीं. अब नरेंद्र मोदी के पिछले तीन साल में भी कुछ नहीं बदला है. बल्कि हो ये रहा है कि अब नौकरियां पैदा होने के बजाय कम हो रही हैं.”
और सिर्फ आईटी सेक्टर में ही समस्या नहीं है. टेलिकॉम और बैंकिंग सेक्टर में भी छंटनी हो रही है. एसी खबरें हैं कि एचडीएफसी बैंक ने लोगों को निकाला है. टेलिकॉम सेक्टर की कई कंपनियों में भी छंटनी हो रही है. हेडहंटर्स के लक्ष्मीकांत साफ कहते हैं कि यह संकट बड़ा है और भारत इसके लिए तैयार नहीं है. वह कहते हैं, “लोगों को लग रहा है कि ऐसा होगा तो मेरे नहीं किसी और के साथ होगा. लेकिन यह सच नहीं है. सबको पता है कि ऐसा हो रहा है. और ये वे लोग हैं जिन्होंने लोन पर घर लिए हुए हैं, गाड़ियां ली हुई हैं. इनकी किश्तें जाती हैं. तो यह संकट बड़ा है और हम इसके लिए तैयार नहीं हैं.”




