Voting rights to NRIs seem around the corner

NRIs

Source: SBS

Indian government has cleared the move to provide voting rights to NRIs. Overseas Indians will be given a right to appoint a nominee as a proxy voter.


भारत सरकार ने यह प्रस्ताव पारित कर दिया है कि विदेशों में बसे भारतीयों को भारतीय चुनावों में वोटिंग का अधिकार दिया जाएगा. प्रस्ताव यदि मौजूदा स्वरूप में संसद में पास होता है तो एनआरआई प्रॉक्सी के जरिए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोट डाल पाएंगे. ऑस्ट्रेलिया में बसे काफी भारतीय इस खबर से खुश नजर आ रहे हैं. सिडनी में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गुरनाम सिंह कहते हैं कि यह बहुत ही अच्छा कदम है. वह कहते हैं, “ये तो बहुत ही अच्छा कदम है क्योंकि भारत से बाहर रहने वाले लोग इसके जरिए ज्यादा जुड़ाव महसूस करेंगे.”

अभी भारत में इस तरह परोक्ष रूप से वोटिंग का अधिकार सिर्फ फौजियों को है. सेना में काम करने वाले लोग अपने रिश्तेदारों को नामांकित करके वोट डलवा सकते हैं. सरकार ने उसी तरह की योजना विदेशों में बसे भारतीयों के लिए भी बनाई है, बस एक फर्क है. एक आदमी को एक बार ही नॉमिनेट किया जा सकेगा. यानी जिसे आपने अपना वोट डालने के लिए नॉमिनेट किया है, वो दोबारा आपकी तरफ से वोटर नहीं हो सकता. लेकिन ऑस्ट्रेलियन मल्टिकल्चरल काउंसिल के सदस्य भारतीय मूल के वासन स्रीनिवासन कहते हैं कि यह हर हाल में एक अच्छा कदम है क्योंकि इससे विदेशों में बसे भारतीयों को उनका हक मिलेगा. वह कहते हैं, “हम लोग भी भारत को जानते हैं और यहां आकर हमारी समझ और बढ़ी है, तो हम भी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सेदार बनना चाहते हैं.”

दरअसल, विदेशों में बसे भारतीयों के लिए यह एक भावनात्मक मुद्दा भी है. वोट डालने के अधिकार को भारतीय देश में अपनी हिस्सेदारी के अधिकार की तरह देखते हैं. पर्थ में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया हिंदी समाज से जुड़ीं रश्मि लोयल्का कहती हैं कि इससे विदेशों में बसे भारतीय देश से ज्यादा जुड़ाव महसूस कर पाएंगे. वह कहते हैं, “मैं भारत के बारे में लगातार जागरूक रहती हूं. और यहां आकर भारत की खूबियों और कमियों को और अच्छे से देख पाती हूं. लिहाजा मुझे लगता है कि हमें वोटिंग का अधिकार होगा तो हम भारत निर्माण में योगदान दे पाएंगे.”

हालांकि इसकी प्रक्रिया को लेकर थोड़ी चिंताएं भी हैं. दरअसल, पहले सरकार सोच रही थी कि बैलट पेपर के जरिए वोट करवाए जाएं, जिन्हें पोस्ट किया जाता है. मतलब आप बैलट पेपर प्रिंट करके फिर उस पर मुहर लगाकर डाक से भेज सकते हैं. इस पूरी प्रक्रिया के अध्ययन के लिए मंत्रियों की एक टीम बनाई गई थी. इस बारे में अभी आखिरी फैसला आना बाकी है. इस बीच बात यह चल रही है कि प्रॉक्सी वोटिंग पर आगे बढ़ा जाए. लेकिन वासन इस प्रक्रिया से सहमत नहीं हैं. वह कहते हैं, “प्रॉक्सी के सिस्टम से तो मैं सहमत नहीं हूं क्योंकि हमारा भारत के बारे में, उसके विकास के बारे में एक विचार है और जरूरी नहीं है कि उस विचार को प्रॉक्सी के रूप में सही तरीके से पहुंचाया जा सके.”

एक ऐसी अवधारणा भी है कि भारतीय जनता पार्टी का आधार विदेशी भारतीयों के बीच बाकी पार्टियों से ज्यादा है, इसलिए भी बाकी दल इस कदम पर असहमत रहे हैं. लेकिन ऑस्ट्रेलिया में बसीं सामाजिक कार्यकर्ता सृजना इससे सहमत नहीं हैं. वह कहती हैं, “नहीं ये तो बहुत बड़ा बायस है क्योंकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सब लोग बीजेपी के हैं. बहुत से लोग निष्पक्ष भी हैं.”

अब इस बात पर सहमति बनने के बाद इंतजार इस प्रस्ताव के संसद में जाने का होगा. वहां से पास होने के बाद भारतीय मूल के लोग जहां कहीं भी हों, वे भी सरकार बनाने में अपनी हिस्सेदारी कर पाएंगे.


Share
Download our apps
SBS Audio
SBS On Demand

Listen to our podcasts
Independent news and stories connecting you to life in Australia and Hindi-speaking Australians.
Ease into the English language and Australian culture. We make learning English convenient, fun and practical.
Get the latest with our exclusive in-language podcasts on your favourite podcast apps.

Watch on SBS
SBS Hindi News

SBS Hindi News

Watch it onDemand