रश्मि लोयल्का जब भारत आईं तो उन्हें ये डर सताने लगा कि उनकी बेटियों को हिंदी ना आई तो क्या होगा. उन्हें लगा कि अगर भारत वापस जाना हुआ तो बेटियां पढ़ाई में पिछड़ जाएंगी क्योंकि वे हिंदी पढ़-लिख नहीं पाएंगी. और उन्हें यह बात भी अच्छी नहीं लग रही थी कि उनकी मातृभाषा उनके बच्चे ना समझ पाएं. इसी डर ने प्रेरित किया रश्मि लोयल्का को. उन्होंने पहले अपने बच्चों को हिंदी सिखाई. और अब वह औरों के बच्चों को हिंदी सिखा रही हैं. सुनिए उनकी मजेदार कहानी...

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