NSW's first Sikh Councillor John Arkan is also know as John Joravar Singh. His father Peter Singh gave Australian names to him and his brothers. And this is John's message.
न्यू साउथ वेल्स में एक जगह है कॉफ्स हार्बर. कॉफ्स हार्बर के पास एक छोटा सा गांव है वूलगूलगा. और वूलगूलगा में रहते हैं जॉन... जॉन अरकैन... या फिर जॉन जोरावर सिंह. जॉन नाम सुनकर आप समझेंगे कि कोई ऑस्ट्रेलियन है. पर बंदा एकदम खालिस पंजाबी है. ऑस्ट्रेलिया में जन्मे जॉन जोरावर सिंह जॉन कैसे हुए, इसकी बड़ी दिलचस्प कहानी है. वह बताते हैं, “मेरे पिता का नाम है पीटर सिंह. 1885 में मेरे बाबाजी ऑस्ट्रेलिया आए थे. और मेरे पिता 4-5 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया आए तब उन्हें उन्हें हरजीत पीटर सिंह नाम मिला. जब मेरा बड़ा भाई जन्मा तो अस्पताल में नाम लिखवाने की बात आई. तब मेरे पिताजी ने बोल दिया कि पीटर रख दो. पर मेरी मां ने कहा, नहीं मेरे बच्चों का नाम ऐसा नहीं हो सकता. तब सहमति बनी पीटर करनैल. फिर मैं जन्मा तो डैड ने कहा कि इसका नाम जॉन रखेंगे. मां ने तब जोरावर जोड़ दिया.”
और जॉन बन गए जॉन जोरावर सिंह. पर जॉन ने अपने बच्चों के नाम देसी रखे हैं. उनके बच्चे हैं सहज सिंह, आनंद सिंह, प्रकाश कौर और जीवन सिंह. वह कहते हैं, “मैंने छोटे नाम रखे क्योंकि बच्चों को ऑस्ट्रेलिया में रहना है लेकिन पंजाबी नाम रखे तो उनकी मां बहुत खुश हो गई.”
काउंसिलर जॉन अरकैन की दो पहचान हैं. वह जॉन भी हैं और जोरावर भी. वह भारतीय भी हैं और ऑस्ट्रेलियाई भी. वह कहते हैं कि यही ऑस्ट्रेलिया की खूबसूरती है. यानी सारा भारत उन्हें जोरावर के नाम से जानता है. नहीं, ऐसा नहीं है... वहां पता है कि जॉन भी है कोई. भारतीय समाज में लोग उन्हें जोरावर के नाम से ही जानते हैं. लेकिन पंजाब में उनके गांव में उनके पिता का बनाया मकान है जिस पर तीनों भाइयों के नाम पिता के नाम के साथ लिखे हैं. यानी, पीटर सिंह ऐंड सन्स, पीटर, जॉन और जेफ्री.
अपनी इस मिश्रित पहचान को जॉन अरकैन अपनी ताकत मानते हैं और चाहते हैं कि हम सब इतने ही खुलेपन के साथ जिएं. वह कहते हैं, “यह हमारी ताकत है. हमें एक ही जैसा नहीं रहना है. हमारे अंदर सबकी खूबियां होनी चाहिए.”