बात 16 मई 2014 की है. लोकसभा चुनावों के बाद वोटों की गिनती हो रही थी. हम लोग न्यूज रूम में बैठे खबरें लिखे जा रहे थे. बीजेपी इतनी जगह से आगे, कांग्रेस उतनी जगह से पीछे, बीजेपी यहां भी जीती, कांग्रेस वहां भी हारी. और जैसे ही भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों का आंकड़ा पार किया, हमारे तत्कालीन संपादक ने कहा, अब मोदी को 2019 में भी कोई नहीं हरा पाएगा. सब लोग हैरान थे. अभी सिर्फ चुनाव जीता है और आप ऐसी बातें कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोगों के पास कोई विकल्प ही नहीं होगा. फिर कुछ दिन बाद बिहार का चुनाव हुआ और नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन ने बीजेपी को बुरी तरह हराया. नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए चुनौती के रूप में देखा जाने लगा. इसी साल फरवरी में नीतीश कुमार डंके की चोट पर बीजेपी को चुनौती दे रहे थे.
वही नीतीश कुमार जुलाई 2017 में यानी 2019 के लोकसभा चुनाव से लगभग दो साल पहले कहते हैं, “मोदी जी को चुनौती देना अब किसी के बस में है नहीं.”
गंगा में बहुत गंदा पानी बह चुका है. बेरोजगारी और निर्यात के गिरते ग्राफ सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं. करोड़ों अरबों के नोट बैन हो चुके हैं. जीएसटी का जोर और एससी एसटी का पुरजोर विरोध भी देखा जा चुका है. इस सबके बाद भी नीतीश कुमार का यह बयान भारतीय राजनीति के मौजूदा परिदृश्य की अद्भुत कहानी बयान करता है. भारत की राजनीति पिछले तीन साल से नरेंद्र मोदी के इर्द गिर्द घूम रही है. क्या अगले सात साल और ऐसा ही रहेगा?