ऊबर, मेन्युलोग, डिलीवरू आदि फूड डिलीवरी सेवाओं के साथ काम करने वाले कर्मचारियों ने आज सिडनी में ऊबर कंपनी के मुख्यालय के सामने प्रदर्शन किया.
प्रदर्शनकारियों ने ऊबर कंपनी को लाखों डॉलर्स का एक इनवॉइस भी दिया, जो उनके मुताबिक, छुट्टियों, सुपर, काम करते वक्त लगी चोट और उन घंटों की तन्ख्वाह का हर्जाना है जिसके लिए उन्हें भुगतान नहीं किया गया.
मेन्युलॉग के लिए डिलीवरी का काम करने वाले अनु श्रेष्ठ बताते हैं कि डिलीवरी ड्राइवर्स के हालात काफी खराब हैं. वह कहते हैं, "आपको अपना वाहन लाना होता है. उस वाहन का सारा खर्च आप खुद वहन करते हैं. उसके इंश्योरेंस से लेकर सर्विसिंग तक सारी जिम्मेदारी आपकी है. और यह सब खर्च चुकाने के बाद हमें 9 से 15 डॉलर के बीच ही मिल पाते हैं. इतने में काम कैसे करें."
यह भी पढ़ें:
श्रेष्ठ इससे पहले फूडोरा कंपनी के साथ थे, जो बंद हो गई. इस हफ्ते फूडोरा 1700 राइडर्स को लगभग 2.3 मिलियन डॉलर का भुगतान करेगी जो कम तन्ख्वाह देने की एवज में होगा.
टांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन के संयोजक टोनी शेल्डन कहते हैं कि फूड डिलीवरी करने वालों ठगा जा रहा है. वह कहते हैं, "ये लोग रोज काम पर आते हैं लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि तन्ख्वाह मिलेगी. तन्ख्वाह न्यूनतम आय से कम है. ना उन्हें कोई सुपर मिलता है ना बीमारी की छुट्टी या सालाना छुट्टी. जब काम करते वक्त उनके साथ कोई हादसा हो जाता है तो कोई सहारा या उचित मुआवजा भी नहीं मिलता. बिना कोई चेतावनी दिए उन्हें निकाल दिया जाता है और उस फैसले के खिलाफ कोई अपील भी नहीं की जा सकती. हम ऊबर और अन्य कंपनियों को बताना चाहते हैं कि अब बस बहुत हुआ. शोषण बंद करो और कर्मचारियों को उचित भुगतान करो."
पिछले साल राइडशेयर ड्राइवर्स के बीच हुए सर्वे में सामने आया था कि लगभग तीन चौथाई कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन से कम आय मिलती है. लगभग आधे ड्राइवर्स के साथ काम पर कोई हादसा हुआ या मारपीट हुई. तीन ड्राइवरों की तो हत्या भी हो चुकी है.
अनु श्रेष्ठ बताते हैं कि बहुत बार ऐसा होता है जब घंटों तक बिना काम के इंतजार भी करना पड़ सकता है. वह कहते हैं, "व्यस्त समय के दौरान कई बार ऐसा होता है कि दो-तीन घंटे में एक डिलीवरी करने को मिलती है. खाना गिर गया तो हमें उसका पैसा देना होगा. अगर कोई हादसा हो जाता है तो उसके लिए कोई इंश्योरेंस आदि का भुगतान नहीं मिलेगा."
ड्राइवरों की मांग है कि उन्हें किसी भी सामान्य कर्मचारी की तरह अधिकार मिलने चाहिए.


