इस कहानी का एक पहलू और है. एमएलए का इतिहास है जिसे बार-बार दोहराया जाता है. विवादास्पद विज्ञापनों का इतिहास.
अगर एमएलए के पुराने विज्ञापनों को उठाकर देखा जाए तो आपको ऐसे कई मामले मिलेंगे जब इस संस्था के विज्ञापनों पर किसी ना किसी तबके ने आपत्ति जताई.
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इसी साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया डे के मौके पर लैम्ब का ही विज्ञापन था जिसे मूल निवासियों ने आपत्तिजनक बताया था. उस विज्ञापन में मूल निवासी कलाकार यूरोपीयों का स्वागत करते नजर आए थे. काफी लोगों ने उसे इतिहास का श्वेतीकरण बताते हुए लताड़ा था.
पिछले साल जनवरी में एमएलए के एक विज्ञापन से वीगन्स आहत हुए थे जब न्यूजरीडर ली लिन चिन को एक विज्ञापन में दिखाया गया था. इसमें एक वीगन को पुलिसिया ऑपरेशन की शक्ल में 'बचाते' हुए दिखाया गया था.
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इन दोनों विज्ञापनों की शिकायत हुई थी. वीगन वाले विज्ञापन की तो 376 शिकायतें आई थीं जो ऑस्ट्रेलिया के इतिहास की तीसरी सबसे ज्यादा शिकायतें थीं. हालांकि एएसबी ने उस विज्ञापन को भी सही ठहराया था.
लेकिन इन विवादों के कारण विज्ञापनों को खूब प्रचार मिला. एक विज्ञापन विशेषज्ञ कहते हैं कि विवाद खड़ा करना संस्था की रणनीति हो सकती है लेकिन इसे साबित नहीं किया जा सकता. जब इस बारे में एमएलए से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कोई जवाब नहीं मिला.
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