23 साल की सुश्री कौर बीते सोमवार रात मेलबर्न पहुंची थीं. उनके अंकल मेलबर्न में हैं जिनके न्योते पर वह ऑस्ट्रेलिया आई थीं.
उन्होंने अपने सामान में कुछ दवाएं होने की बात इमिग्रेशन कार्ड पर लिखी थी जिसके चलते बॉर्डर फोर्स के अफसरों ने सामान की जांच की.
सुश्री कौर ने एसबीएस पंजाबी को बताया, "मेरे पास कुछ दवाएं थीं. और कुछ हल्का फुल्का खाने का सामान था जो मैं रास्ते में खाने के लिए अमृतसर से लेकर आई थी. शायद इसीलिए उन्होंने मेरे सामान की जांच की."
जांच के बाद सुश्री कौर से कई घंटे तक सवाल जवाब किए गए.
उनकी आंटी रमन ने बताया, "हम रात को 9.30 बजे एयरपोर्ट के बाहर आ गए थे और सुबह 5 बजे तक इंतजार करे रहे. इस बीच अफसर हमारे पास आए और पूछा कि वह कितने दिन रहेगी. अगर हमें पता होता कि वह अपने सर्टिफिकेट लेकर आएगी तो हम उसे मना कर देते. हम तो बस उसे घुमाना चाहते थे. क्रिसमस की छुट्टियों में हम सिंगापुर जाने वाले थे."
अफसरों को सामान में आईएलटीएस और दूसरे सर्टिफिकेट मिले जो कपड़ों के अंदर रखे गए थे.
बॉर्डर फोर्स के अधिकारियों ने पाया कि सुश्री कौर के पास सिर्फ 100 डॉलर थे जबकि वह तीन महीने ऑस्ट्रेलिया में रहना चाहती थी.
अपने फैसले में बॉर्डर फोर्स के अधिकारी ने लिखा, "उन्हें ऑस्ट्रेलिया के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उनके पास समुचित धन भी नहीं है. उनके पास उनके सारे एजुकेशनल दस्तावेज हैं. ये बातें एक ईमानदार वीसा धारक से मेल नहीं खातीं."
सुश्री कौर कहती हैं कि वह सवाल-जवाब के दौरान उलझन में पड़ गईं और उन्होंने कुछ गलतियां कर दीं.
उन्होंने कहा, "इसका मतलब यह तो नहीं कि मुझे हथकड़ी लगा दी जाए और मेरे साथ अपराधी सा व्यवहार किया जाए. यह मेरे लिए बहुत शर्मसार करने वाली बात थी. मुझे पता होता तो मैं कभी ना आती."
सुश्री कौर को ब्रॉडमीडोज हिरासत केंद्र में ले जाया गया और अगले दिन कुआलालंपुर की फ्लाइट में बिठा दिया गया.
