रुद्र कहते हैं कि ग्रेड (कक्षा) 3 से ही उन्हें गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि रही है।
मुख्य बातें:
- रुद्र जलवायु परिवर्तन पर एक किताब भी लिख चुके हैं
- मेलबॉर्न की एक स्थानीय निकाय ने इन्हे यंग ऑस्ट्रेलियन सिटीजन ऑफ़ द ईयर के सम्मान से भी नवाजा है
- रुद्र के अभिवावक चाहते हैं कि उनका बेटा भारतीय संस्कृति से जुड़ा रहे और हिन्दी भाषा की पढ़ाई जारी रखे
समय के साथ-साथ जब रुद्र की दिलचस्पी सौरमंडल, अंतरिक्ष और उसमें मौजूद अनगिनत तारों से जुड़े रहस्यों को जानने में बढ़ने लगी तो उन्होंने किताबों और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों का रुख किया।
रुद्र के पिता अमित कहते हैं कि उनके बेटे ने ग्रेड 5 में ही ग्रेड 12 के विज्ञान और गणित की पढ़ाई कर ली थी और साथ ही ओपन यूनिवर्सिटी के विज्ञान से जुड़े कुछ विषयों का अध्ययन भी पूरा कर लिया था।
रुद्र के पिता अमित जो मेलबॉर्न की एक आईटी कंपनी में कार्यरत हैं, वह बताते हैं कि जब रुद्र ग्रेड 6 में पहुंचे तो उन्होंने रुद्र को अपनी जानकारी बढ़ाने और उत्साह को जारी रखने के लिए खगोलभौतिकी में काम कर रहे शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के साथ संपर्क बढ़ाने का सुझाव दिया।
इसके बाद दोनों पिता-पुत्र ने विश्वविद्यालयों और संस्थाओं द्वारा आयोजित लेक्चर और सेमिनार में भाग लेना शुरू कर दिया। ऐसे ही एक लेक्चर के दौरान इनकी मुलाकात स्विनबर्न टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय के तारा-भौतिकविद प्रोफेसर मैथ्यू बेल्स से हुई।

अमित कहते हैं कि प्रोफेसर बेल्स ने रूद्र के साक्षात्कार के तुरंत बाद ही उसे अपने एक अनुसंधान में शामिल करने का न्यौता दे डाला।
रुद्र कहते हैं कि उन्होंने बिना एक पल गवांए उस समय तो हाँ कह दिया, पर जब वह शोध के साथ जुड़े तो पता चला यह कार्य इतना भी आसान नहीं था।
ग्रेड 9 में पढ़ने वाले रूद्र पिछले तीन सालों से शोध कार्यों में हिस्सा ले रहे हैं। रुद्र का मानना है कि उनका पहला शोध पत्र, जिसे उन्होंने स्विनबर्न टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों
सी फ्लिन, टी वेनविल, एम. डिक्सन, ए डफी, जे मोल्ड और ई एन टेलर के साथ लिखा है, खगोलभौतिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
रुद्र, अल्फिंगटन ग्रामर स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं और वह अपनी सफलता का श्रेय अपने अध्यापकों के साथ-साथ स्कूल द्वारा प्रदान की गई छात्रवृति को भी देते हैं।
वह अपने स्कूल का आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि अगर उनका स्कूल नियमों में थोड़ी ढ़ील नहीं देता तो वह अपनी पढ़ाई के साथ अपने शोध को जारी नहीं रख पाते।
रूद्र कहते हैं कि स्कूल की पढ़ाई बहुत जरूरी है, जबकि शोध के लिए तो पूरी जिंदगी बाकी है।
रुद्र की सफलता की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। रुद्र जलवायु परिवर्तन पर एक किताब भी लिख चुके हैं और उन्हें मेलबॉर्न की एक स्थानीय निकाय ने यंग ऑस्ट्रेलियन सिटीजन ऑफ़ द ईयर के सम्मान से भी नवाज़ा है।
वह स्थानीय निकाय के पर्यावरण से जुड़े प्रोजेक्ट्स जैसे कि रोबोट वाकिंग स्कूल बस, वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम और सेविंग एनिमल्स फ्रॉम एनिमल-व्हीकल एक्सीडेंट्स के साथ भी जुड़े हैं।
रुद्र की माता प्रियंका को उनके बेटे पर गर्व है। पर वह अपने बेटे को एक कामयाब वैज्ञानिक के साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनता हुआ देखना चाहती हैं।
रुद्र के अभिवावक चाहते हैं कि उनका बेटा भारतीय संस्कृति से जुड़ा रहे और हिन्दी भाषा की पढ़ाई जारी रखे।
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