आपने स्कूल में ज़रूर पढ़ा होगा कि दुनिया को सुचारू तौर पर चलते रहने के लिए जैव संतुलन कितना ज़रूरी है। पिछले साल जब ऑस्ट्रेलिया भीषण आग की चपेट में था तब भी जीवविज्ञानियों ने जैव असंतुलन को लेकर चिंता ज़ाहिर की थी। लेकिन कुछ वैज्ञानिक मानते हैं मिट्टी के अंदर की पारिस्थितिकी भी बहुत महत्वपूर्ण है जिसके संतुलन पर तुरंत ध्यान दिया जाना बहुत ज़रूरी है।
मुख्य बातें:
- संयुक्त राष्ट्र के फूड ऐंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन ने मिट्टी की जैव विविधता पर एक रिपोर्ट तैयार की है।
- इस रिपोर्ट में दुनिया भर के करीब 300 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने अपना योगदान दिया है।
- रिपोर्ट के मुख्य लेखकों में से एक वेस्टर्न सिडनी विश्व विद्यालय से प्रोफेसर ब्रजेश सिंह कहते हैं कि मिट्टी की जैव विविधता को संरक्षित किए बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
पिछले दिनों दुनिया भर के करीब 300 वैज्ञानिकों ने सॉइल बायोडाइवर्सिटी पर एक अहम रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के मुख्य लेखकों में से एक प्रोफेसर ब्रजेश सिंह वेस्टर्न सिडनी विश्वविद्यालय के ग्लोबल सेंटर फॉर लैंड बेस्ड इनोवेशन के डायरेक्टर हैं।
सुनिए प्रोफेसर ब्रजेश सिंह से पूरी बातचीतछ
प्रोफेसर ब्रजेश कहते हैं, "मिट्टी की जैव विविधता को संरक्षित किए बिना दुनिया में जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जलवायु संरक्षण से लेकर स्वच्छ भूजल तक में मिट्टी की जैव विविधता का महत्वपूर्ण योगदान है।"
प्रोफेसर ब्रजेश बताते हैं कि ये रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के फूड ऐंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइज़ेशन की है। वह कहते हैं कि इस रिपोर्ट के लिए उनके सहित 13 दूसरे वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया गया था और चूंकि दुनिया भर से जुड़ी इस रिपोर्ट को पूरा करने के लिए ये संख्या बहुत कम थी इसलिए दुनिया भर से करीब 300 वैज्ञानिकों जोड़ा गया।
प्रोफेसर ब्रजेश कहते हैं कि सॉइल बायोडाइवर्सिटी के बारे में सबसे चिंताजनक बात ये है कि हमें सिर्फ ये पता है कि ये कम हो रही है लेकिन किस हद तक इसका सही अंदाज़ा अभी नहीं लगाया गया है।

View of the Chamelecon River breaking it's banks and flooding Source: Sipa USA Seth Sidney Berry / SOPA Images/
प्रोटेक्टिंग सॉइल बायोडाइवर्सिटी एसेंशल इन अडैप्टिंग टु क्लाइमेट चेंज नाम की इस रिपोर्ट में इन वैज्ञानिकों ने कुछ सुझाव भी दिए हैं. इनमें कीटनाशकों का सीमित प्रयोग और किसानों सहित कृषि से संबंधित अधिकारियों और आम लोगों को मिट्टी की जैव विविधता है प्रति जागरुक करना शामिल है।






