अब संभव है इस लाइलाज बीमारी से लड़ाई

The diagnosis Cystic Fibrosis written on a clipboard

Source: Getty Images/Zerbor

सिस्टिक फाइब्रोसिस को अब तक लाइलाज़ और घातक बीमारियों में गिना जाता था. अब यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी कांग्रेस ने एक ऐसी चिकित्सा पद्धति की खोज की है जिससे कि सिस्टिक फाइब्रोसिस के पीड़ितों की ज़िंदगी बढ़ सकती है.


इस नए उपचार में एक टैबलेट दी जाएगी जो कि तीन दवाओं का मिश्रण है. अमेरिका में विकसित किए गए इस नए उपचार पर ब्रिसबेन के प्रिंस चार्ल्स अस्पताल में प्रयोग चल रहा है

सिस्टिक फाइब्रोसिस एक ऐसी अनुवांशिक बीमारी है जो कि ज़िंदगी के लिए ख़तरनाक होती है. इस बीमारी में  पाचन और श्वसन प्रणाली को नुकसान पहुंचता है. आस्ट्रेलिया की बात करें तो करीब ढाई हज़ार में से किसी एक बच्चे को इस बीमारी से पीड़ित पाया गया है. इस बीमारी के बारे में बताते हुए रूटी हिल मेडिकल सेंटर से डॉक्टर विनय मेहरा कहते हैं कि ये बीमारी जीवन के लिए घातक है और इसमें डॉक्टर अब तक बस मरीज़ को ज्यादा से ज्यादा जीवित रखने की कोशिश ही कर सकते हैं.

Dr Vinay Mehra_GP
Dr. Vinay Mehra, GP Rooty Hill Medical and dental Centre Source: Supplied

अब तक इस बीमारी के पारंपरिक उपचार के बारे में बताते हुए डॉक्टर विनय कहते हैं कि इस अब तक डॉक्टर इस बीमारी की वजह से होने वाली अनेकों तरह की परेशानियों और लक्षणों का ही उपचार किया करते थे. लेकिन नई खोज से वो उत्साहित नज़र आते हैं. 

प्रिंस चार्ल्स अस्पताल में एडल्ट सिस्टिक फाइब्रोसिस सेंटर के निदेशक डॉक्टर डेविड रीड को उम्मीद है कि नए उपचार से मरीज़ों को काफी राहत मिलेगी. वो कहते हैं कि बड़ी बात ये है कि नई ट्रिपल ड्रग थेरेपी बीमारी के लक्षणों की बजाए बीमारी के कारणों पर काम करती है.

ब्रिसबन के प्रिंस चार्ल्स अस्पताल के प्रोफेसर स्कॉट बैल को अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक पैनल का अध्यक्ष चुना गया था. उन्होंने अपने निष्कर्षों को ई आर एस कांग्रेस में प्रस्तुत भी किया था. डॉक्टर बैल कहते हैं कि नए उपचार के शुरूआती परिणाम उम्मीद जगाते हैं.

हालांकि अभी तक ये नहीं कहा जा सकता कि इस दवा के दीर्घकालिक परिणाम क्या होंगे. लेकिन अनुमान लगाया जा सकता है कि आस्ट्रेलिया में सिस्टिक फाइब्रोसिस से पीड़ित करीब साढ़े तीन हज़ार लोगों में 90 फीसदी को इस दवा से फायदा मिल सकता है.

डेरेन बलॉक एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं. और सिस्टिक फाइब्रोसिस से पीड़ित हैं उन्हें उम्मीद है कि नए उपचार से उन्हें फायदा होगा और वो लंबे समय तक अपने परिवार के साथ रह पाएंगे.

उम्मीद की जा रही है कि इस दवा को 2 साल के अंदर ऑस्ट्रेलियन फार्मास्यूट्कल्स, बेनेफिट्स स्कीम पर मंजूरी मिल जाएगी और तब ये दवा सब्सिडी में मिलने लगेगी. हालांकि ये दवा मरीज़ों को सालाना 250 हज़ार डॉलर कीमत की मिलेगी.


Share

Follow SBS Hindi

Download our apps

Watch on SBS

SBS Hindi News

Watch it onDemand

Watch now