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भारत में भी खुल रही हैं ऑस्ट्रेलिया जैसी स्ट्रीट लाइब्रेरी

Supplied by Faisal Fareed
मीना गुरुंग अपनी स्ट्रीट लाइब्रेरी के नन्हे चाहने वालों के साथ Source: Supplied by Faisal Fareed

सोचिए, अगर आप सड़क पर जा रहे हैं और रास्ते में दीवार के सहारे कोई एक लकड़ी का रैक रखा हुआ है जिसमे किताबें हैं। क्या आपके कदम रुक जाएंगे?


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Source: SBS



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सोचिए, अगर आप सड़क पर जा रहे हैं और रास्ते में दीवार के सहारे कोई एक लकड़ी का रैक रखा हुआ है जिसमे किताबें हैं। क्या आपके कदम रुक जाएंगे?


यूं सड़क किनारे किताबें रखीं देख शायद आप अनायास ही एक किताब उठा कर पढ़ने लगेंगे? पढ़ने के बाद आप किताब रख कर फिर चल देंगे। फिर ये सोचते भी रहेंगे कि किस सज्जन ने ये बुक रैक बाहर रख दी है!


खास बातेंः

  • मीना गुरुंग ने अरुणाचल प्रदेश की पहली स्ट्रीट लाइब्रेरी खोली है।
  • उनका मकसद बच्चों को पढ़ाई की ओर आकर्षित करना है।
  • मीना गुरुंक एक शिक्षिका हैं और ईटानगर के पास रहती हैं।

ऑस्ट्रेलिया में कई शहरों में जगह-जगह स्ट्रीट लाइब्रेरी नजर आ जाती हैं। अब कुछ वैसा ही किया है अरुणाचल प्रदेश की एक टीचर मीना गुरुंग ने। उन्होंने अपने जनपद में ऐसा करने की सोची है क्योंकि उनका मिशन है कि उनके राज्य में शराब की दुकानों से ज़्यादा किताबें हों।

Street library
सिडनी के सबर्ब आर्टारमन में हैंपडन रोड पर स्ट्रीट लाइब्रेरी Source: Vivek Asri/SBS

मीना अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से 19 किलोमीटर दूर पापुमपारे नमक जगह पर रहती हैं। पेशे से एक शिक्षिका हैं। उन्होंने देखा कि मोबाइल पर बच्चे व्यस्त रहते हैं लेकिन किताबों से दूर भागते हैं क्योंकि किताब पढ़ने की आदत अब धीरे धीरे कम होती जा रही है।

यहां सुनिए, मीना गुरुंग की कहानी उन्हीं की जुबानीः

ऐसे में मीना ने अपने स्तर से एक छोटा लेकिन अहम प्रयास किया। किताबों के लिए लकड़ी का रैक बनाया और उसको सड़क किनारे रख दिया।

अब जिसका मन हो आकर पढ़े, बैठे और फिर किताबें रख कर चला जाये। न कोई कुछ कहेगा, ना ही कोई कुछ उनसे मांगेगा।

यह एक तरह की स्ट्रीट लाइब्रेरी है। अरुणाचल प्रदेश में पहली बार ऐसा ट्रेंड शुरू हुआ है।  

मीना के प्रोजेक्ट में जो भी खर्च हुआ उन्होंने खुद ही किया है। प्रयास को कामयाबी मिल रही है। बच्चे आने लगे हैं। वे बच्चों को चॉक्लेट देती हैं कि वे आएं और पढ़ें। मीना बताती हैं कि बड़े बच्चे अभी झिझक में नहीं आते लेकिन प्रयास जारी है और कई लोग कहते हैं कि इस तरह की लाइब्रेरी दूसरी जगहों पर भी खोल दीजिये।

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