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गरीबों का सहारा बनी अमन की मुफ्त बाइक एम्बुलेंस

Aman on his bike ambulance in Varanasi, UP

Aman on his bike ambulance in Varanasi, UP Source: Supplied by Aman

अपने लिए तो सभी जीते हैं लेकिन जो दूसरे के लिए जिए उसे दुनिया महान कहती है। बनारस के अमन यादव एक ऐसे ही इंसान हैं। युवा हैं, जोशीले हैं और दूसरों की मदद को ही अपने जीवन का ध्येय बना चुके हैं।


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Source: SBS


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अपने लिए तो सभी जीते हैं लेकिन जो दूसरे के लिए जिए उसे दुनिया महान कहती है। बनारस के अमन यादव एक ऐसे ही इंसान हैं। युवा हैं, जोशीले हैं और दूसरों की मदद को ही अपने जीवन का ध्येय बना चुके हैं।


अमन को बनारस में सब जानते हैं और अमन बनारस की सारी गलियां जानते हैं।


मुख्य बातेंः

  • बनारस के अमन यादव अपनी बाइक से बीमारों को अस्पताल पहुंचाते हैं।
  • इस काम के लिए अमन कोई पैसा नहीं लेते।
  • गरीब-जरूरमंदों की सेवा को ही उन्होंने अपना ध्येय बना लिया है।

इस ज़िंदा शहर बनारस की अमन शान हैं। उनका काम है मरीज़ों को अस्पताल पहुंचाना। इसके लिए उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल को ही एम्बुलेंस बना लिया हैं। उनका फोन नंबर शहर भर के लोगों के पास है और जरूरत पड़ने पर लोग बेझिझक उनको फोन करके बुला लेते हैं।

इनमें सबसे ज़्यादा ऐसे गरीब लोग होते हैं जिनके पास एम्बुलेंस को देने के लिए पैसे नहीं हैं।

सुनिए, अमन की कहानी उन्हीं की जबानीः

अमन उन्हें अपनी बाइक से अस्पताल ले जाते हैं,भर्ती करवाते हैं और इलाज में मदद करते हैं। ये सब काम अमन निशुल्क करते हैं। सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त लोग,मानसिक रूप से विक्षिप्त लोग हों या फिर जिनका कोई सहारा न हो,अमन सबकी मदद करते हैं।

अमन के पास एक पुरानी बाइक थी जिसे उन्होंने एम्बुलेंस बना दिया है। आज जब लोग अपने वृद्धजनों को छोड़ देते हैं, तो अमन ही उनका एक सहारा हैं। और इस सेवा के बदले अमन को कुछ भी नहीं चाहिए होता है।

अमन की बाइक एम्बुलेंस पूरे बनारस में मशहूर हैं। शहर की पतली गलियों में यही बाइक एम्बुलेंस एक सहारा है।

अमन के पास बहुत ज्यादा निजी संसाधन भी नहीं हैं। ऐसे में वह कैसे अपनी बाइक एम्बुलेंस चलाते हैं? वह लोगों से पैसा लेते हैं लेकिन सिर्फ एक रूपया। जो भी पैसा एक-एक रूपया लेने से मिलता है, वही अमन बाइक के तेल,बीमारों की दवाई आदि में खर्च करते हैं।

करोना काल में हालात और भी खराब थे। अस्पताल तक आम बीमारों का पहुंचना मुश्किल था। साधारण सर्दी ज़ुकाम को लोग करोना की आशंका में भयभीत हो जाते थे। ऐसे में बनारस में अमन का काम और महत्वपूर्ण हो गया और पूरे करोना काल में उनकी बाइक एम्बुलेंस बनारस की गलियों और अस्पतालों में दौड़ती रही।

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