मुख्य बिंदु
- यह पूर्वाग्रह कि ऑस्ट्रेलिया भर में इंडिजिनस संस्कृति एक जैसी ही है, गलत है।
- निर्मित पर्यावरण डिज़ाइन में एक विकासशील बदलाव यह है कि परियोजनाओं को कंट्री पर आधारित बनाना सामान्य प्रथा बनने की दिशा में है, जो पारंपरिक शहरी योजना से हटकर एक नई दिशा को दर्शाता है।
- कंट्री-आधारित डिज़ाइन में, योजना से लेकर कार्यान्वयन तक, प्रथम राष्ट्र के ज्ञानधारक, पर्यावरण और विशेष परियोजना स्थल की प्रथाएं इस प्रक्रिया को संचालित करती हैं।
संयुक्त राष्ट्र की आदिवासी लोगों के अधिकारों की घोषणा के तहत, आदिवासी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के सभी पहलुओं पर आदिवासी स्वामित्व सुरक्षित है।
हाल के वर्षों में, ऑस्ट्रेलिया में आदिवासी लोगों के साथ कला परियोजनाओं पर काम करने के दौरान रचनात्मक प्रथाओं के मानकों को स्थापित करने के लिए कई प्रोटोकॉल बनाए गए हैं।
लेकिन ऑस्ट्रेलियाई शहरों में, इंडिजिनस ज्ञान और उनकी सतत प्रथाओं को हमारी सार्वजानिक जगहों में कैसे प्रदर्शित किया जा सकता है?
हमने इंडिजिनस और गैर-इंडिजिनस, दोनों विशेषज्ञों से उनके विचार साझा करने के लिए कहा कि कैसे ऐसी जगहें और इमारतें बनाई जा सकती हैं, जो दोनों, इंडिजिनस और पश्चिमी ज्ञान प्रणालियों से प्रेरणा लें।

प्रोफेसर ब्रायन मार्टिन, मूल रूप से न्यू साउथ वेल्स के रहने वाले बंडजलुंग, मुरुवारी और कमिलारोई लोगों के वंशज हैं, अंतरराष्ट्रीय इंडिजिनस डिज़ाइन चार्टर के सह-लेखकों में से एक हैं, जो सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील व्यावसायिक डिज़ाइन के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रोटोकॉल निर्धारित करता है।
वे समझाते हैं कि किसी भी निर्मित परियोजना के लिए, चाहे वह सार्वजनिक भवन हो, चौक हो, या म्यूरल हो— डिज़ाइन को उस स्थान की इंडिजिनस संस्कृति से मेल खाना चाहिए।
सभी ज्ञान स्थान से आता है।प्रोफेसर ब्रायन मार्टिन, सह-लेखक, इंटरनेशनल इंडिजिनस डिज़ाइन चार्टर
"और यही कारण है कि सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रोटोकॉल उस स्थान के पारंपरिक मालिकों और उस विशेष स्थान और देश से संबंधित ज्ञान पर ध्यान केंद्रित करने के बारे में हैं।"
इंडिजिनस-नेतृत्वित डिज़ाइन 'कंट्री-केंद्रित डिज़ाइन' है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में एक ही इंडिजिनस संस्कृति नहीं है।
"समानता का विचार उन चीज़ों की अनदेखी करता है जो स्थानीय रूप से विशिष्ट होती हैं। उदाहरण के तौर पर, विक्टोरिया में बूनवुरुंग देश न्यू साउथ वेल्स के कमिलारोई, क्वींसलैंड के बिडजारा, या पर्थ के नुंगर से बहुत अलग है," प्रोफेसर मार्टिन बताते हैं।
जेफ़ा ग्रीनवे इससे सहमत हैं। वे विक्टोरिया में प्रारंभिक रूप से मान्यता प्राप्त इंडिजिनस आर्किटेक्ट्स में से एक हैं। वे मूल रूप से न्यू साउथ वेल्स से हैं और वाइलवैन/कमिलारोई और धरावल लोगों के वंशज हैं।
ग्रीनवे कहते हैं कि वास्तुकला में इंडिजिनस संस्कृतियों की विविधता को स्वीकार करना "आवाज़ और अधिकार को समर्थन देने का एक अवसर बन जाता है।"
"यह डिज़ाइन समानता के विचार को समर्थन देता है... अक्सर, फर्स्ट नेशंस के लोगों को बड़ी निर्मित परियोजनाओं में भाग लेने के लिए हमेशा स्थान नहीं मिला है।"

समुदाय-विशिष्ट डिज़ाइन, भूगोल से आगे बढ़कर रिश्तेदारी, रिवाज़, आध्यात्मिक विश्वास और भाषा जैसे पहलुओं से जुड़े संबंधों को भी शामिल करता है।
मेलबर्न विश्वविद्यालय के सिटी कैंपस में घूमते हुए, आप इस इंडिजिनस-नेतृत्वित डिज़ाइन दृष्टिकोण का एक उदाहरण देख सकते हैं। यह वह स्थान है जहां छात्र परिसर स्वानस्टन स्ट्रीट पर सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (CBD) से जुड़ता है।
श्री ग्रीनवे, जिन्होंने इस परियोजना का सह-नेतृत्व किया, बताते हैं कि इंडिजिनस भागीदारों को शुरू से ही डिज़ाइन प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इन भागीदारों ने स्थान के पास पुराने जल प्रवाहों की ओर इशारा किया, जहां से 60,000 वर्षों से भी अधिक समय से ईल प्रजनन के लिए बिरररंग (यारा नदी) तक प्रवास करते रहे हैं।
टीम ने एक एम्फीथिएटर और प्लाज़ा मार्ग को पुनः धारा के रूप में डिज़ाइन किया, जिसमें देशज वनस्पतियों और सामग्री का उपयोग किया गया। इसके साथ ही, परिसर के चारों ओर तालाबों के साथ एक जल संग्रह नेटवर्क भी बनाया गया।
हालांकि पुरानी जलधारा को शहर के स्टॉर्मवाटर सिस्टम का समर्थन करने के लिए पाइपलाइन में डाला गया था, लेकिन ईल आज भी इसके माध्यम से प्रवास करते हैं।
यह उस समझ को नए सिरे से प्रस्तुत करता है कि हम 67,000 वर्षों की उस विरासत और इस स्थान के निरंतर संबंध पर निर्माण कर रहे हैं।जेफा ग्रीनवे, ग्रीनवे आर्किटेक्ट्स
श्री ग्रीनवे कहते हैं कि इस डिज़ाइन ने इंडिजिनस सांस्कृतिक निरंतरता को केंद्र में ला दिया।

प्रोफेसर मार्टिन कहते हैं कि 'संबंध' इंडिजिनस-नेतृत्वित डिज़ाइन प्रक्रियाओं का एक बुनियादी तत्व है।
डिज़ाइनरों को स्थान और उसके लोगों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए और सांस्कृतिक प्रोटोकॉल को चेकलिस्ट कार्यों के रूप में नहीं देखना चाहिए जो किसी परियोजना के एक चरण पर समाप्त हो जाते हैं।
“परियोजना के दौरान, चाहे वह शोध परियोजना हो या डिज़ाइन परियोजना, संबंध बनाए जाते हैं।
“चाहे वह कोई आर्किटेक्चरल फर्म हो, सरकारी निकाय हो, या प्रैक्टिशनर खुद हों, उन्हें अभी भी लोगों और स्थान के साथ संबंध बनाने की आवश्यकता है।”
डेज़ीरे हर्नांदेज़ इबिनारियागा, मयान, एज़्टेक और बास्क विरासत की एक मैक्सिकन महिला हैं, और मोनाश विश्वविद्यालय के डिज़ाइन विभाग में वरिष्ठ व्याख्याता हैं।
अपने पीएचडी शोध के दौरान, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और मैक्सिको में इंडिजिनस युवा महिलाओं और गैर-इंडिजिनस शिक्षकों के साथ, प्रथम राष्ट्र के ज्ञान और जैव-सांस्कृतिक विविधता को प्राथमिकता देने के लिए एक परियोजना डिज़ाइन पद्धति विकसित की।

अपना शोध शुरू करने से पहले, डॉ. इबिनारियागा क्षेत्रीय विक्टोरिया के एक बोर्डिंग स्कूल में इंडिजिनस छात्रों के साथ रहीं।
“लड़कियों, शिक्षकों और स्कूल के स्टाफ़ के साथ संबंध बनाने और उनकी स्वीकृति पाने में मुझे आठ महीने लगे।”
उनका शोध एक जैव-सांस्कृतिक कार्यशाला (बायोकल्चरल वर्कशॉप) में परिणत हुआ, जिसका उद्देश्य छात्रों की सांस्कृतिक पहचान को देश के साथ संबंधों के माध्यम से सशक्त बनाना था।
“कंट्री वह स्थान है जहां हम मौजूद हैं; मैं इसे 'टोनंत्सिन्तल्ली' कहती हूं, जिसका मेरी पूर्वजों की भाषा नाहुआटल में अर्थ है 'मदर अर्थ',” डॉ. इबिनारियागा कहती हैं।
“इंडिजिनस पद्धतियों में हम उन कंट्री, भूमि, आकाश और जल को केंद्र में रखते हैं, जिनमें हम रहते हैं।
"लेकिन यह संबंधों के बारे में भी है—वे संबंध जो हमारे भौतिक और अमूर्त चीज़ों के साथ हैं।”

ओलिविया हाइड, गवर्नमेंट आर्किटेक्ट एनएसडब्लू की डिज़ाइन एक्सीलेंस की निदेशक हैं। उन्होंने प्रमुख आर्किटेक्ट डिलन कॉम्बुमेरी, जो क्वींसलैंड के गोल्ड कोस्ट के युगामबेह समुदाय के सदस्य हैं, और उनकी समर्पित टीम के साथ मिलकर कनेक्टिंग विद कंट्री फ्रेमवर्क विकसित किया।
इस फ्रेमवर्क को अपनाने वाले परियोजना साझेदार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध थे कि निर्मित पर्यावरण परियोजनाएं देश और समुदाय दोनों के लिए सकारात्मक परिणाम प्रदान करें।
“यह इंडिजिनस समुदायों के लिए है, ताकि वे अपनी परियोजनाओं पर उन परिणामों का नेतृत्व कर सकें जो वे वहां देखना चाहते हैं,” हाइड कहती हैं।
“यह स्थानीय सरकारी एजेंसियों के लिए है, ताकि वे अपनी परियोजनाओं पर इंडिजिनस समुदायों के साथ उचित और सम्मानजनक तरीके से जुड़ सकें।
यह आर्किटेक्ट्स और अन्य निर्मित पर्यावरण डिजाइनरों और डेवलपर्स के लिए भी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके द्वारा बनाई गई परियोजनाएं स्वस्थ्य कंट्री के परिणाम पैदा कर रही हैं।”
पाँच वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए इस फ्रेमवर्क में कंट्री-नेतृत्वित दृष्टिकोण के तत्व शामिल हैं, जो पहले से मौजूद परियोजनाओं, जैसे पैरामैटा स्क्वायर, में देखे गए थे।
“यह शुरू से ही धारुग सांस्कृतिक ज्ञानधारकों के साथ डिज़ाइन किया गया था,” हाइड समझाती हैं।
“इसमें समुदाय के साथ मिलकर योजनाओं के विकास की एक गहरी और सहभागी प्रक्रिया शामिल थी।”

प्रोफेसर मार्टिन, जिनकी पृष्ठभूमि दृश्य कला और रचनात्मक अभ्यास में है, कहते हैं कि परियोजना डिज़ाइन में प्रतीकात्मक (टोकनिस्टिक) दृष्टिकोण का उपयोग करना कोई असामान्य बात नहीं है।
मेरे पास ऐसे अनुभव हैं जहां टेंडर प्रक्रिया के अंत के करीब मुझसे संपर्क किया गया, और ऐसा महसूस हुआ जैसे, ‘ओह, हमें एक आदिवासी व्यक्ति को शामिल करना होगा।प्रोफेसर ब्रायन मार्टिन, इंटरनेशनल इंडिजिनस डिज़ाइन चार्टर के सह-लेखक
“उस कथा में जो चीज़ अक्सर छूट जाती है, वह यह है कि यह इंडिजिनस-नेतृत्वित नहीं होता।
“परिणामस्वरूप, आप एक ऐसी चीज़ पर पहुंचते हैं जो प्रक्रिया में और फिर अंतिम भवन, उत्पाद, या जो भी हो, उसमें कंट्री की संरचना को समाहित नहीं करती।”
हाइड बताती हैं कि पैरामैटा स्क्वायर के मामले में, डिज़ाइनरों ने इस स्थान के इतिहास और निरंतर प्रथाओं को दृश्यमान बनाने के लिए काम किया।
इसमें इंडिजिनस कला कृति, एक धारुग सभा चक्र, और पथरीली सतहों में इनले किए गए डिज़ाइन, जो हज़ारों वर्षों से इंडिजिनस सभाओं के ऐतिहासिक साक्ष्यों को संदर्भित करते हैं, शामिल किये गए।
“यह इस स्थान पर एबोरिजिनल लोगों के लंबे समय तक निवास और उनके लिए इसके सांस्कृतिक महत्व की बात करता है।
“लेकिन यह इस बात की भी पहचान है कि संस्कृति जीवित है, यह चलती रहती है और यह अनंत है।
“इसलिए यह सुनिश्चित करना है कि जीवित सांस्कृतिक प्रथाएं जीवित और संरक्षित रहें, उनका उत्सव मनाया जाए, और जहां उचित हो, यह सभी के लिए और कुछ विशेष लोगों के लिए खुला हो।”
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