"गोलोयो की बौछार, घायल तड़पते इंसान , स्वास्थ्य सेवा का आभाव . .फिर भी जीवन के प्रति खूब लगाव . .." - डॉ निशांत कहते है के संघर्ष क्षेत्र में अपने कार्यकाल के दौरान यही सीखा है के हर पल में जिन्दी है. अपने संघर्ष क्षेत्र कार्यकाल के बारे में हरिता महेता के साथ खास बातचीत
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