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“मैं आरक्षण का विरोध करता हूँ क्योंकि इससे दलितों को नुकसान होता है”: राज रतन अंबेडकर

“मैं आरक्षण विरोध करता हूँ क्योंकि इससे दलितों को नुकसान होता है”: राज रतन अंबेडकर

भारत के दलित समाज को आरक्षण की सवैंधानिक व्यवस्थाओं के माध्यम से बराबरी का दर्ज़ा दिलवाने के लिए पहचाने जाने वाले डॉ भीमराव अंबेडकर के पड़-पोते राज रतन अंबेडकर आरक्षण को ख़त्म करने के पक्षधर हैं।


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By Jitarth Jai Bharadwaj, जितार्थ जय भारद्धाज

Source: SBS


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भारत के दलित समाज को आरक्षण की सवैंधानिक व्यवस्थाओं के माध्यम से बराबरी का दर्ज़ा दिलवाने के लिए पहचाने जाने वाले डॉ भीमराव अंबेडकर के पड़-पोते राज रतन अंबेडकर आरक्षण को ख़त्म करने के पक्षधर हैं।


अपनी बात को जय भीम जय गुरुदेव के साथ शुरू करने वाले राज रतन अंबेडकर बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष हैं। 

उन्होंने एसबीएस हिंदी को बताया कि जय भीम कहकर भारत का दलित समाज डॉ अंबेडकर प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करता है।

“जातिगत भेदभाव को मिटा कर सभी नागरिकों को समान अधिकार देने के लिए इस अभिवादन से हम उनका नमन करते हैं।”

उनका कहना है कि भारत की आज़ादी के वक्त से अब तुलना करने पर लगता है कि जाति का ज़ोर बढ़ गया है।

“मैं किसी भी रूप में होनेवाली जातिवादी व्यवस्था का विरोध करता हूँ। ब्राह्मण, ठाकुर या दलित कोई भी जातिवादी व्यवहार करे वो गलत है।”

श्री अंबेडकर का कहना है कि वे आरक्षण का विरोध करते हैं। 

“बाबा साहेब ने उस समय कहा था कि आरक्षण हमको ज्यादा समय नहीं चाहिए। हमको आप आरक्षण देने के बजाए भारत के सभी बच्चों को सबसे बेहतरीन शिक्षा मुफ्त दे दो।”

“किसी की जाति देखें बिना ६ साल से लेकर १४ साल तक की आयु के बच्चों के लिए राज्य द्वारा शिक्षा का इंतज़ाम करने से आरक्षण की जरुरत समाप्त हो जाएगी।”

 


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