फ्यूल की कीमतें बढ़ गई हैं, और इसलिए कीमतों में कथित बढ़ोतरी को लेकर चिंताएं और शिकायतें भी बढ़ गई हैं। क्या रिटेलर्स इस संकट का फ़ायदा उठा रहे हैं?
ऑस्ट्रेलियन कॉम्पिटिशन एंड कंज्यूमर कमीशन (ACCC) का कहना है कि वह दूर-दराज और रीजनल ऑस्ट्रेलिया के सप्लायर्स की जांच कर रहे हैं।
यह 70% से ज़्यादा फ्यूल सरचार्ज की शिकायतों पर कार्रवाई है।
शहरों में कैफे, रेस्टोरेंट और ट्रैवल कंपनियों पर भी फ्यूल सरचार्ज लगाए जाने की खबरें आई हैं।
ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट के सीनियर इकोनॉमिस्ट मैट ग्रुडनॉफ ने SBS एग्ज़ामिन्स को बताया कि ऑस्ट्रेलिया में कस्टमर्स को गुमराह करना गैर-कानूनी है — जैसे, यह झूठा दावा करना कि कीमतें सिर्फ़ लागत बढ़ने की वजह से बढ़ी हैं।
वैसे कीमत बढ़ाने के कुछ दूसरे तरीके असल में कानूनी हैं।
ज़्यादातर लोगों को यह नहीं पता, लेकिन कीमत बढ़ाना गैरकानूनी नहीं है।Matt Grudnoff, senior economist, the Australia Institute
"यदि कोई फर्म देखती है कि हर कोई मूल्य वृद्धि के बारे में बात कर रहा है और वे इसके आधार पर अपनी कीमतें बढ़ाने का फैसला करते हैं, भले ही उनकी लागत नहीं बढ़ी हो, तो यह पूरी तरह से कानूनी है," ग्रुडनॉफ ने कहा।
मेलबर्न यूनिवर्सिटी में आर्थिक अनुसंधान के रिची चेयर प्रोफेसर डेविड बायरन ने कहा कि मूल्य वृद्धि से लड़ने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण है।
लेकिन उन्होंने कहा कि यह ऑस्ट्रेलिया में एक चुनौती है।
"हमारे पास आपूर्ति करने वाली कम फर्म हैं। और इसलिए पेट्रोल में भी यही देखते हैं। हम इसे बैंकिंग, सुपरमार्केट में देखते हैं ... इन कंपनियों के पास बाजारवाद की शक्ति है," उन्होंने कहा।
जब मार्केट में कुछ ही प्लेयर्स होते हैं, तो कॉम्पिटिशन में कमी का मतलब है कि आपको ज़्यादा कीमतें मिलेंगी।Professor David Byrne, the University of Melbourne
SBS Examines के इस एपिसोड में, हम प्राइस गौजिंग पर नज़र डाल रहे हैं और पूछ रहे हैं: ऑस्ट्रेलियाई लोग भविष्य में फ्यूल प्राइस शॉक के लिए कैसे तैयार हो सकते हैं?
SBS नेपाली, SBS रशियन और SBS चाइनीज़ की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ।





