पहली बार, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया और तब से योग के प्रति विश्व भर में जागरूकता आयी है।
खास बातें-
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा हुई थी।
- 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्यों ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के तौर पर मनाने का प्रस्ताव पारित किया।
- भारत के महर्षि पतञ्जलि को योग दर्शन का जनक माना जाता है।
योग को अब वैज्ञानिक दृष्टि से भी मान्यता मिली है और पिछले कई सालों से यह भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी लोकप्रिय हो गया है।
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महर्षि पतञ्जलि कृत योग दर्शन और जीवन में योग के महत्व पर चर्चा करते हुए मेलबर्न की डॉ. मृदुल कीर्ति बताती हैं कि योग मन, मस्तिष्क एवं शरीर का एक अभ्यास है। और योग विज्ञान पर आधारित एक शारीरिक क्रिया है।
“पतंजलि योग दर्शन, गणितीय भाषा में सूत्रात्मक शैली (जिसमें बड़ी से बड़ी बात कम से कम शब्दों में कहा जाए) में रचित सृष्टि का एक अद्वितीय, यौगिक विज्ञान का विस्मयकारी ग्रन्थ है, जिसमें मनुष्य के प्राण से लेकर महाप्राण तक अंतर्यात्रा, मृणमय से चिन्मय तक जाने का यौगिक ज्ञान, मूलाधार से सहस्रार तक ब्रह्मैक्य का आंतरिक ज्ञान, मर्म और दर्शन समाहित है।”

डॉ. कीर्ति बताती हैं कि योग प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। योग और ध्यान को अध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए अनिवार्य माना गया है।
वह कहती हैं-
“योग पद्धति में ऋषि पतञ्जलि ने अष्टांग योग से परिचित कराया। अष्टांग योग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। जिसमें प्रथम पांच दैहिक क्रिया हैं जो तन को संयमित और अनुशासित करते हुए क्रमशः अंतश्चेतना और मन को उर्ध्वगामी करने के बाह्य प्रयास है, किन्तु धारणा, ध्यान और समाधि - त्रयं एकत्र संयम - ये आंतरिक चित्त, मन, और अंतर्वर्ती संवेगों के विषय हैं। यह सर्वथा कालातीत और कालजयी ग्रन्थ त्रिकालदर्शी तत्वों का समीकरण है; जबकि हम केवल तत्काल दर्शी हैं। “
डॉ. मृदुल कीर्ति ने सामवेद, ईशादि नौ उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता का काव्यानुवाद ब्रज भाषा में तथा 'पतंजलि योग दर्शन और शंकराचार्य विरचित 'विवेक चूड़ामणि ' समेत कई ग्रन्थों का काव्यात्मक और व्याख्यात्मक अनुवाद किया है.

योग दर्शन के बारे में वह बताती हैं कि पूरा दर्शन शुरू के दो सूक्तों का विस्तार है जिसमें अनुशासन और विचारों को नियंत्रित करने का संकेत है। वह कहती हैं, “मन के मनीषी होने तक की दैहिक, मानसिक, आंतरिक और आध्यात्मिक यात्रा ही योग दर्शन है।”
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में एक विशेष दिन को मना कर जीवन में योग के महत्व को मान्यता मिली है।
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में योग के विषय पर बात की थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्यों ने योग की उपयोगिता को स्वीकारते हुए इसे मान्यता दी और एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव को पारित किया।
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