आप में से बहुत से लोगों ने फिल्म बजीराओ मस्तानी देखि और सराही भी होगी। बजीराओ पेशवा प्रथम ने अपनी दूसरी पत्नी मस्तानी के लिए १७३४ में बनवाया था एक आलिशान महल, जिसका नाम था 'मस्तानी महल'। आईनों , झुम्मरों, चित्रों, वाद्य यंत्रों और मेहराबों से सुसज्जित ये महल १८२८ में एक आग में जल गया था। स्थानीय लोग बताते हैं कि आज भी अमावस्या की काली रातों में वो 'बचाओ बचाओ ' की पुकार सुनते हैं. किसकी हैं ये चीखें?आईये सुनते हैं 'मस्तानी महल' के कुछ अद्भुत पहलूओं पर ये अंश कुमुद मिरानी के संग।
आप में से बहुत से लोगों ने फिल्म बजीराओ मस्तानी देखि और सराही भी होगी। बजीराओ पेशवा प्रथम ने अपनी दूसरी पत्नी मस्तानी के लिए १७३४ में बनवाया था एक आलिशान महल, जिसका नाम था 'मस्तानी महल'। आईनों , झुम्मरों, चित्रों, वाद्य यंत्रों और मेहराबों से सुसज्जित ये महल १८२८ में एक आग में जल गया था। स्थानीय लोग बताते हैं कि आज भी अमावस्या की काली रातों में वो 'बचाओ बचाओ ' की पुकार सुनते हैं. किसकी हैं ये चीखें?आईये सुनते हैं 'मस्तानी महल' के कुछ अद्भुत पहलूओं पर ये अंश कुमुद मिरानी के संग।