2020 में, साइक्लोन हैरोल्ड ने सोलोमन आइलैंड्स, फिजी, टोंगा और वानुआतु को तहस-नहस कर दिया था।
एस्पिरिटू सैंटो आइलैंड पर, तस्मालम स्कूल तबाह हो गया था।
स्कूल को फिर से बनाने के लिए काम कर रही संस्था PASIFIKAID के CEO, पीटर जैमीसन ने कहा कि जब वह चार साल बाद वहां गए तो यह अभी भी खंडहर में पड़ा था।
उन्होंने कहा, "बच्चे लंच के समय खेल रहे थे और ज़मीन पर पड़े जंग लगे टिन और बड़ी-बड़ी लकड़ियों पर चढ़कर छत तक जा रहे थे।"
"स्कूल को ठीक करने के लिए कुछ नहीं किया गया था। ऐसा नहीं है कि सरकार नहीं चाहती थी। सरकार के पास पैसे नहीं हैं क्योंकि बहुत सारी मुसीबतें आई हैं।"

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ द रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ में पापुआ न्यू गिनी के कंट्री डेलीगेशन की प्रमुख माकी इगाराशी ने कहा कि देश की दूरस्त स्थिति, मदद करने वाले संगठनों की क्षमता, रिकवरी के काम को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा, "कभी-कभी हमें मछली पकड़ने वाली नाव जैसी छोटी नाव का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसमें कई घंटे लग जाते हैं।"
"कुछ दिन पहले मैं कुक आइलैंड्स की बात कर रहा था। आइलैंड तक पहुँचने में [लगभग] एक हफ़्ता लगता है। इसलिए आप पैसिफ़िक में उसका पैमाना, दूरी या पहुँच की चुनौती समझ सकते हैं।"
ब्यूरो ऑफ़ मेटेरोलॉजी में इंटरनेशनल डेवलपमेंट के जनरल मैनेजर एंड्रयू जोन्स ने कहा कि क्लाइमेट चेंज का असर मदद नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा, "समुद्र के स्तर में बढ़ोतरी और मौसम की बहुत ज़्यादा खराब घटनाओं का बढ़ता असर, पैसिफ़िक के सामने अभी और आने वाले सालों में आने वाले सबसे बड़े खतरों में से एक है।"
"प्रशांत पर इसका जो प्रभाव पड़ रहा है वह अभूतपूर्व है और वास्तव में, वैश्विक मंच पर इसकी पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।"
SBS Examines को फ़ॉलो या सब्सक्राइब करें। हम Our Pacific के विभिन्न पहलुओं के बारे में बात कर रहे हें।




