भारत में क्षेत्रीय फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए "लास्ट फिल्म शो" ने इस वर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है। इस पॉडकास्ट में सुनिये फिल्म के लेखक और निर्देशक पैन नलिन के साथ इस अर्ध-आत्मकथात्मक फिल्म को बनाने के कारणों और चुनौतियों पर की गयी एक बातचीत।
Key Points
- बाल कलाकार भाविन रबारी को इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता का भारत का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।
- इस फिल्म ने अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता है
- 95 वें ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर श्रेणी के लिये यह फिल्म भारत की आधिकारिक प्रविष्ठी थी
एसबीएस हिंदी से बात करते हुए पैन नलिन ने बताया कि जब लगभग 10 साल पहले, वह काठियावाड़ में अपने शहर में (गुजरात में एक सुदूर स्थान) गए, वहाँ उनकी मुलाकात अपने एक पुराने मित्र मोहम्मद भाई , जो उम्र में उनसे काफी बड़े थे, उनके साथ हुयी और जो बचपन के दिनों में उनको प्रोजेक्टर रूम से फिल्में देखाते थे।

मूवी थिएटरस् डिजिटल हो जाने के कारण मोहम्मद भाई के पास अब कोई काम नहीं था। वह बहुत दुखी थे। उन फिल्म रीलों से चम्मच, चूड़ियां आदि बनायी गयी थीं। बचपन से जुड़ी वह सब यादें और इस बदलाव ने मुझे इस फिल्म कहानी को लिखने के लिये प्रेरित किया।'Last Film Show" Director Pan Nalin
नलिन ने बताया कि फिल्म से जुड़े सभी लोग एक पेशेवर बाल कलाकार चाहते थे क्योंकि पूरी फिल्म उस बच्चे के कंधे पर ही टिकनी थी।लेकिन जब मुंबई और महानगरों में हजारों ऑडिशन के बाद भी उन्हें कोई नहीं मिला, तो उन्होंने उसी ग्रामीण इलाके में जाने का फैसला किया जहां फिल्म की शूटिंग होनी थी। यह गुजरात का एक सुदूर स्थान था जहाँ बच्चे बहुत कम ही फिल्में देखने जाते थे
“वहाँ मुझे न केवल मेरा बाल नायक भाविन मिला, बल्कि वे सभी बच्चे भी मिले, जिन्हें मैं 'लाला गैंग ऑफ चलाला' कहता हूं। उनको उस स्थान की भाषा आदि का स्वाभाविक अनुभव था। ऑडिशन के लिये मैॆने भाविन की केवल आँखों के विभिन्न शॉट लिए, उसकी आँखों ने सभी भावों को व्यक्त किया।” नलिन ने बताया

नलिन ने बताया कि ऐसे स्वाभाविक प्रतिभा के कलाकारों के साथ काम करने में फायदा है लेकिन यह बेहद चुनौतीपूर्ण भी है।
“मुझे शूटिंग का गैर-पारंपरिक तरीका अपनाना पड़ा। बच्चों को फिल्म निर्माण के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए टेक और रीटेक को समझना उनके लिए मुश्किल था। जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि पहले दो टेक सबसे अच्छे होंगे, इसलिए दृश्यों को कैद करने के लिए अतिरिक्त कैमरों का इस्तेमाल किया गया।''
चूंकि बच्चों के साथ काम करने के घंटों पर भी प्रतिबंध होता है, इसलिए नलिन ने बताया कि शूटिंग के दिनों को प्रबंधित करना चुनौतीपूर्ण था।
उनकी स्कूल की पढ़ाई का भी ध्यान रखना था, और बाहरी इलाके में शूटिंग करना जहां शेर सहित जंगली जानवर रेलवे ट्रैक पर नियमित रूप से आते थे, चुनौती के साथ-साथ एक अनुभव भी था!Pan Nalin, Director "Last Film Show"

लेखक/निर्देशक पैन नलिन की अर्ध-आत्मकथात्मक फिल्म, 'लास्ट फिल्म शो', 9 साल के बच्चे 'समय' का अपनी 35 mm की फिल्म बनाने का सपना, एक अनोखी दोस्ती और फिल्म स्टॉक का डिजीटल में बदलते युग को दर्शाती है। .
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