'साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं बल्कि दीपक भी है'; डा वेद प्रकाश 'व्यथित'

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A few published books of Dr Ved Prakash Sharma 'Vyathit' Source: SBS / SBS/Anita Barar

जाने माने भारतीय कवि लेखक डा वेद फ्रकाश शर्मा 'व्यथित ' के साथ इस पॉडकास्ट में सुनिये उनकी नयी पुस्तकों के बारे में जो पौराणिक कथाओं पर आधारित है और साथ ही उनके काव्य खंड 'पानी' के बारे में जिसमें वह मानवीय जीवन में पानी के अनेक संदर्भों पर प्रकाश डालते है।


एस बी एस हिन्दी से बात करते हुये डा वेद प्रकाश शर्मा 'व्यथित' कहते हैं कि साहित्य समाज का दर्पण होने के अलावा दीपक है जो समाज को दिशा दिखाता है।

अपने नये 'खंड काव्य अहिल्या' के लिये वह कहते हैं, "अहिल्या वह स्त्री है जो दाम्पत्य जीवन और पारिवारिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है।"

अहिल्या खंड काव्य और न्याय याचना, यह दोनो ही रचनायें पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं ।

वह कहते हैं कि पौराणिक कथाओं को उस तत्कालीन समाज के मूल्यों और संदर्भ में देखना चाहिये और समय समय पर उन कथाओं को वर्तमान आधुनिक समय के अनुसार संदर्भित करना आवश्यक है।

Dr Ved Prakash Sharma 'Vyathit'
Dr Ved Prakash Sharma 'Vyathit' Source: Supplied / Dr Ved Prakash Sharma 'Vyathit'

डा 'व्यथित' अपनी ताजा काव्य रचना 'पानी', पर चर्चा करते हुये कहते हैं,

"पानी आचमन के लिये पवित्र है, विशालता के लिये समुद्र है, लघुता के लिये नन्हा कण है बूंद है, ओस और कभी बर्फ है।"

डा वेद 'व्यथित' के साथ लिये इन्टरव्यु को सुनिये:-

पानी की आवश्यकता , उसके आध्यात्मक, भावात्मक, और सामाजिक पहलु पर प्रकाश डालते हुये वह कहते हैं कि सभी के जीवन में पानी के गुणो की तरह मित्र होने चाहिये। वह मित्र जो आवश्यकता पड़ने पर मित्र के गुस्से को शान्त कर दे।

दूध और पानी की मित्रता का उदाहरण देते हुये वह अपने काव्य की कुछ पंक्तियां भी सुनाते हैं,

यदि तपिश दूध को जब लगे

उसकी तपिश बुझाता पानी।

कितना भी उफान आ जाये

उसको शान्त कराता पानी।

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Οι οριζόντιοι καταρράκτες της Δυτικής Αυστραλίας Source: AAP / AAP image/Kimberley Media, Kevin Pearce

पानी को बचाने और उसकी शुद्धता बनाये रखने की आवश्यकता पर जोर डालते हुये वह कहते हैं कि

पानी तो अमृत होता है

मानव गंदा करता पानी

यदि शुद्धता बनी रहे

तो जीवनदायक है यह पानी।

डॉ वेद प्रकाश व्यथित ने कई उपन्यास, काव्य नाटक, काव्य तथा कई नयी विधाओ पर काम किया है, लेखन किया है। उनकी कई कविताओ का अँग्रेजी, जापानी, रूसी, फ्रेंच, नेपाली तथा पंजाबी भाषा में अनुवाद हो चुका है।प्रकाशित पुस्तकों में काव्य नाटक- मधुरिमा, उपन्यास - आखिर वह किया करे, काव्य संकलन - अंतर्मन आदि कुछ प्रमुख रचनायें हैं। इसके अलावा उनके कई व्यंग्य संग्रह जैसे गुलाबी ठंड, बोलने की बीमारी, उल्टावाद भी प्रकाशित हो चुके हैं। तथा व्यंग्य लेखन के लिये उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

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