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हिन्दी साहित्य के झरोखे से - अनुभूति से परिपूर्ण महादेवी वर्मा

feather pen

महादेवी वर्मा की लेखनी हृदय की कोमलता और सरलता का मार्मिक चित्रण करती है। Credit: Big_Ryan/Getty Images

हिन्दी साहित्य के विभिन्न साहित्यिक पुरस्कारों से अलंकृत कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा छायाबाद के चार आधार स्तम्भों में से एक थीं। पद्य एवं गद्य दोनों ही विधाओं में संवेदना, विरह वेदना, रहस्यवाद, नारी-हृदय की कोमलता और सरलता का मार्मिक चित्रण करती उनकी लेखनी सहज एवं प्रवाहपूर्ण है। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी ने उन्हें माता सरस्वती की उपाधि प्रदान की।


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By Anita Barar

Presented by Anita Barar

Source: SBS


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हिन्दी साहित्य के विभिन्न साहित्यिक पुरस्कारों से अलंकृत कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा छायाबाद के चार आधार स्तम्भों में से एक थीं। पद्य एवं गद्य दोनों ही विधाओं में संवेदना, विरह वेदना, रहस्यवाद, नारी-हृदय की कोमलता और सरलता का मार्मिक चित्रण करती उनकी लेखनी सहज एवं प्रवाहपूर्ण है। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी ने उन्हें माता सरस्वती की उपाधि प्रदान की।


महादेवी वर्मा ने एक ओर अपने लेखन से नारी-हृदय की सरलता और उसकी पीड़ा का चित्रण किया तो वहीं उनकी लेखनी व्यक्तिपरक अनुभवों से सामाजिक परिवर्तन तथा महिलाओं की जागरूकता की आवाज बनी।

 Old quill pen, books and papyrus scroll on the table.
Writer's work Source: iStockphoto / FotoDuets/Getty Images/iStockphoto

जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और सुमित्रानंदन पंत तीन अन्य छायावादी युग के आधार स्तंभ माने जाते हैं।

इस पॉडकास्ट में जानी मानी लेखिका और समीक्षक सुश्री क्षमा शर्मा, महादेवी वर्मा के गद्य पर प्रकाश डालते हुये उनके कुछ संस्मरण साक्षा कर रही हैं।

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