हिन्दी साहित्य के विभिन्न साहित्यिक पुरस्कारों से अलंकृत कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा छायाबाद के चार आधार स्तम्भों में से एक थीं। पद्य एवं गद्य दोनों ही विधाओं में संवेदना, विरह वेदना, रहस्यवाद, नारी-हृदय की कोमलता और सरलता का मार्मिक चित्रण करती उनकी लेखनी सहज एवं प्रवाहपूर्ण है। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी ने उन्हें माता सरस्वती की उपाधि प्रदान की।
महादेवी वर्मा ने एक ओर अपने लेखन से नारी-हृदय की सरलता और उसकी पीड़ा का चित्रण किया तो वहीं उनकी लेखनी व्यक्तिपरक अनुभवों से सामाजिक परिवर्तन तथा महिलाओं की जागरूकता की आवाज बनी।

जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और सुमित्रानंदन पंत तीन अन्य छायावादी युग के आधार स्तंभ माने जाते हैं।
इस पॉडकास्ट में जानी मानी लेखिका और समीक्षक सुश्री क्षमा शर्मा, महादेवी वर्मा के गद्य पर प्रकाश डालते हुये उनके कुछ संस्मरण साक्षा कर रही हैं।
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