वीणा भारत का सबसे पुराना संगीत वाद्य यंत्र, है जो दक्षिण भारत के कर्नाटक संगीत का एक पारंपरिक प्रमुख वाद्य यंत्र माना जाता है।
मेलबर्न वीणा फेस्टीवल में भाग लेने के लिये आये भारत के जाने माने वीणा वादक डी. बालाकृष्णा ने इस इन्टरव्यू में वीणा वाद्य की तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुये बताया,
"वीणा संगीत के मौलिक नियमों का मानकीकरण करती है।"

वीणा वादक डी. बालाकृष्णा को संगीत विरासत में मिला। वह संगीत कलानिधि डॉ. मैसूर वी. डोरेस्वामी अयंगर के पुत्र और शिष्य हैं। बालाकृष्णा ने बचपन से ही अपने पिता के संरक्षण में प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह स्वरों की शुद्धता, मधुरता और भाव से भरपूर राग, लय में विशेषज्ञता और शैली की सहजता के लिए जाने जाते हैं।
एकल संगीत कार्यक्रमों के अलावा, उन्होंने उस्ताद बहाउद्दीन डागर सहित कई प्रख्यात कलाकारों के साथ मंच पर जुगलबंदी की है।
उस्ताद बहाउद्दीन डागर के साथ अपनी जुगलबंदी के लिये वह कहते हैं, “चाहे हम दोनों का स्टाइल अलग है पर हम दोनों एक दूसरे को इंसपायर, प्रभावित करते हैं।”
भारत सरकार द्वारा केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के अलावा डी बालाकृष्णा को 2014 में कर्नाटक संगीत नृत्य अकादमी द्वारा "कर्नाटक कलाश्री” तथा 1979, 1991, 1996, 2006 और 2008 में मद्रास संगीत अकादमी द्वारा सर्वश्रेष्ठ वीणा वादक का पुरस्कार भी मिला है।
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