मेलबर्न वीणा फेस्टीवल 2024: भारत से आयी मेहमान कलाकार इमनी कल्याणी लक्ष्मीनारायण

Emani Kalyani Lakshminarayana

Emani Kalyani Lakshminarayana Source: Supplied / Ramnath Iyer

मेलबर्न में द बोइट, पिचुमनी स्कूल ऑफ कर्नाटक म्यूजिक और अय्यर ब्रदर्स के सहयोग से अगस्त में 2 दिवसीय वीणा फेस्टीवल 2024 का आयोजन हुआ। स्थानीय कलाकारों के अलावा, इस महोत्सव में भारत की जानी मानी पुरस्कृत वीणा वादक इमनी कल्याणी लक्ष्मीनारायन की भी प्रस्तुति रही। इस पॉडकास्ट में सुनिये उनके साथ की गयी एक बातचीत।


वीणा भारत का सबसे पुराना संगीत वाद्य यंत्र, है जो दक्षिण भारत के कर्नाटक संगीत का एक पारंपरिक प्रमुख वाद्य यंत्र माना जाता है।

मेलबर्न वीणा फेस्टीवल में भाग लेने के लिये आयी भारत में की जानी मानी वीणा वादक इमनी कल्याणी लक्ष्मीनारायण ने युवाओं के लिये संगीत के महत्व पर बात करते हुये कहा कि यह उन्हें और बच्चों को सही दिशा की ओर ले सकता है।

"संगीत आपको तनाव से राहत देता है। दरअसल, संगीत को सुनने से मन को शांति मिलती है और स्ट्रेस, थकान दूर होती है। शास्त्रीय संगीत सुनने से मस्तिष्क को स्वस्थ रखने की क्षमता बढ़ती है। यह संस्कृति को समझने की क्षमता बढ़ाता है, तो एक अच्छे समाज की रचना होती है।"

Emani Kayani
Emani Kalyani Lakshminarayana at Melbourne Veena Festival 2024. Accompanying artists Padmini Pasumarthy on Veena (Right) and Nanthesh Sivarajah on Mridangam (left) Source: Supplied / Ramnath Iyer

संगीत और रागों के बारे में कहा जाता है कि वह प्रकृति को प्रभावित कर सकते हैं। कहा जाता है कि राग मेघ या मेघ-मल्हार, को आकाश को हिला देने वाली बिजली पैदा करने और मूसलाधार वर्षा लाने की क्षमता रखने वाला माना जाता है। और तानसेन ने जब दीपक राग गाया तो दिये जल उठे थे।

कल्याणी ने बताया कि यह सब सम्भव हो सकता है अगर शुद्ध सुरों और आस्था का संगम हो।

उन्होंने अपने एक अनुभव को साझा करते हुये हैदराबाद में उन दिनों को याद किया जब बारिश नहीं होने पर वह और अन्य कई कलाकार जो अलग अलग संगीत वाद्यों को बजाते थे, उन सबने एक साथ मिल कर एक कार्यक्रम को आयोजित किया और परिणाम स्वरूप बारिश भी हुयी।

वह कहती है, “मेरा मानना है कि शुद्ध सुर, विचार, आस्था, एकाग्रता यह सब व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से प्रकृति से जोड़ते है। यही शुद्ध संगीत की शक्ति है।”

कल्याणी को संगीत विरासत में मिला। वह महामहोपाध्याय पद्मश्री (दिवंगत) श्री इमनी शंकर शास्त्री की सुपुत्री हैं।

इस वीणा वाद्य यंत्र की तरफ अपनी शुरुवात और उसके लिये रुझान को याद करते हुये बताया कि वह प्रतीक्षा करती थीं कि उनके प्रख्यात पिता उनको शिष्य बनायें ।

अन्तत: वह वीणा बजाने की जटिल तकनीकें सीख सकी। १३ वर्ष की आयु से वह प्रस्तुति देने लगी थी।

"बचपन से ही हमारे कानों में वीणा संगीत गूँजता रहता था। मैं पिता के साथ कार्यक्रमों में जाती थी। और फिर उनके साथ स्टेज साझा किया"

Listen to full interview of Imani Kalyani Lakshminarayana :-

इस इन्टरव्यु में उन्होंने अपने एक खास कार्यक्रम को भी याद किया जिसमें मिली सराहना आज भी उनके लिये अनमोल है।

वह ऑल इंडिया रेडियो की एक शीर्ष श्रेणी की कलाकार हैं और आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों की नियमित प्रसारणकर्ता हैं। पूरे भारत में प्रदर्शन के अलावा, कल्याणी ने कई विदेश यात्रायें की हैं।

आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा उगादि पुरस्कार, श्री श्री रविशंकर से कला सारथी पुरस्कार और शिकागो, यूएसए द्वारा वीणा विद्या विनोदिनी उपाधि से सम्मानित इमनी कल्याणी लक्ष्मीनारायण वीणा बजाने की अपनी विशिष्ट इमनी शैली के लिये जानी जाती हैं, जो वीणा से विभिन्न ध्वनियाँ उत्पन्न करती है।

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