नोटबंदी पर यूँ तो सब की राय सकारात्मक ही कही जा रही है पर फिर भी कहीं कहीं चिन्ता भी जताई जा रही है।
जनसत्ता अखबार के रिपोर्टर का कहना है कि यूँ तो यह एक एतिहासिक फैसला रहा पर इसके परिणाम चौका देने वाले रहे।लोगों को भारी तकलीफ हुयी और कुटीर उद्योग पर बूरा असर पड़ा।
दिल्ली के एक उद्येग से जुड़े सुनीत मल्होत्रा के लिये चिन्ता का विषय हा कि गावों और दूर दराज़ के क्षेत्रों में वहाँ के लोगों को इस बदलाव की जानकारी देने वालों की कमी है। इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया हे।
वैसे फैशन डिजाइनर रीनू इससे प्रसन्न है और वह कहती है कि भारत में भृस्टाचार की तो हद हो चुकी है और अब बेंको के पास पैसा जमा होगा तो लोगों को लोन मिल सकेगा और अर्थ व्यवस्था में सुधार होगा ।
अब आता समय ही तय करेगा कि यह कदम कितना सफल रहा



