बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न लोकप्रिय कवि, नाटककार, कहानीकार, निबंधकार, उपन्यासकार और हिन्दी साहित्य के बुद्ध कहे जाने वाले जयशंकर प्रसाद, हिंदी के छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक थे। उनकी भाषा में ऐसी अद्भुत लय है जो सहज ही माधुर्य पैदा करती है। लेखन की हर विधा को एक नई दिशा देने वाले और कुछ समीक्षकों द्वारा ‘यूरोप में शेक्सपियर जैसे, हिंदी साहित्य में सम्मान के अधिकारी’ कहे गये इस अल्प जीवन काल वाले साहित्यकार पर चर्चा में साथ हैं भारत की जानी मानी लेखिका और समीक्षक क्षमा शर्मा।
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