पेरिस में हो रही एक बड़ी जलवायु शिखर वार्ता में कम संसाधनों वाले देशों की समस्याएं चर्चा का विषय बनी हैं। ऋण सहायता और जलवायु वित्तपोषण जैसे मुद्दे सामने लाये जा रहे हैं ताकि महामारी और जलवायु परिवर्तन की दोहरी मार से ऋण के कुचक्र में फंसे विकासशील देशों की सहायता के रास्ते निकाले जा सकें। वहीं स्वीडन की विश्व-प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबेर्ग का कहना रहा कि सरकारों को यह समझना होगा कि दुनिया के पास जलवायु परिवर्तन की समस्या सुलझाने के लिए अधिक समय नहीं रह गया है।
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