
निराला एक स्वाभिमानी, रुढ़िवादी विचार धाराओं से विद्रोह करते ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने एक ओर अपने भीतरी-बाहरी संघर्षों के साथ-साथ आम लोगों के दुख-दर्द को अंगीकार किया और अपनी रचनाओ में ढ़ाला तो वहीं सौन्दर्य, सांस्कृतिक मूल्यों की आकांक्षा को दार्शनिक या बौद्धिक स्वर भी दिये।
सुनिये सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' के सम्मान में सिंगापुर में बसे विनोद दूबे द्वारा रची इस कविता को भी :-
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