हिन्दी साहित्य के झरोखे से: संवेदनशील सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

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A portrait of the Hindi literary figure Suryakant Tripathi Nirala, first featured in his poetry anthology 'Anamika' in 1923 Credit: Wikimedia Commons/Anamika/Public Domain

हिन्दी के साहित्यकार सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' को छायावाद का पथ प्रदर्शक कवि भी कहा जाता है। वे छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनके रचना संसार में प्रगतिवाद एवं प्रयोगवाद भी मिलता है और अपनी कविताओं से उन्होंने मुक्त छंद का आविष्कार किया था। इस पॉडकास्ट में भारत के लेखक कवि वेद प्रकाश 'व्यथित' महाप्राण निराला के व्यक्तित्व और उनकी रचना शैली के केन्द्र बिन्दु पर प्रकाश डाल रहे हैं।


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Stamp of Suryakant Tripathi in 1976 by the Indian Post Credit: Wikimedia Commons/India Post/GODL

निराला एक स्वाभिमानी, रुढ़िवादी विचार धाराओं से विद्रोह करते ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने एक ओर अपने भीतरी-बाहरी संघर्षों के साथ-साथ आम लोगों के दुख-दर्द को अंगीकार किया और अपनी रचनाओ में ढ़ाला तो वहीं सौन्दर्य, सांस्कृतिक मूल्यों की आकांक्षा को दार्शनिक या बौद्धिक स्वर भी दिये।

सुनिये सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' के सम्मान में सिंगापुर में बसे विनोद दूबे द्वारा रची इस कविता को भी :-

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