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सरोद वादक उस्ताद इरफान खान: लखनऊ शाहजहाँपुर घराने के आखिरी वारिस और संरक्षक

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Ustad Irfan Khan during a performance at Bellingen, New South Wales, Saturday, 21 February 2026 Source: Supplied / Greg Sheehan

भारत का लखनऊ-शाहजहांपुर घराना मूल रूप से सैनिया घराने से संबंधित है। इस घराने की आठवीं पीढ़ी और आखिरी वंशज सरोद वादक, उस्ताद इरफ़ान खान ने एस बी एस हिन्दी पर बताया कि कैसे यह घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत में सरोद वादन की एक विशिष्ट शैली का प्रतिनिधित्व करता है। इस पॉडकास्ट में जानें कि इस घराने के संस्थापक नियामतुल्लाह खान को अफ़गानी रबाब को सरोद वाद्य में बदलने का श्रेय क्यों दिया जाता है और तानसेन के वंशज के साथ उनका क्या सम्बंध था।


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By Anita Barar

Presented by Anita Barar

Source: SBS




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भारत का लखनऊ-शाहजहांपुर घराना मूल रूप से सैनिया घराने से संबंधित है। इस घराने की आठवीं पीढ़ी और आखिरी वंशज सरोद वादक, उस्ताद इरफ़ान खान ने एस बी एस हिन्दी पर बताया कि कैसे यह घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत में सरोद वादन की एक विशिष्ट शैली का प्रतिनिधित्व करता है। इस पॉडकास्ट में जानें कि इस घराने के संस्थापक नियामतुल्लाह खान को अफ़गानी रबाब को सरोद वाद्य में बदलने का श्रेय क्यों दिया जाता है और तानसेन के वंशज के साथ उनका क्या सम्बंध था।


एस बी एस हिन्दी पर अपने घराने की जानकारी साझा करते हुये उस्ताद इरफ़ान खान ने बताया इस घराने की जड़ें अफ़गानिस्तान के बंगाश कबीले से जुड़ी हैं, जिनमें से तीन लोग लगभग 200 साल पहले भारत आ गए थे। उन्होंने बताया कि उनके परदादा नियामतुल्लाह खान नवाब वाजिद अली शाह के दरबार में सरोद बजाते थे।

1954 में लखनऊ में जन्मे इरफ़ान मुहम्मद खान छोटी आयु से ही वह कोलकाता में बस गए। उन्होंने अपने पिता उमर खान (1916-1982) और अपने चाचा इलियास खान (1924-1989) से सरोद और सितार सीखा। आगे चलकर उनका पूरा ध्यान सरोद पर ही केन्द्रित रहा।

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Sarod Maestro Ustad Irfan Khan Source: Supplied / Greg Sheehan

खान साहब ने बताया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वह एक लम्बे अर्से तक पृष्टभूमि में रहे। लेकिन अब अपने घराने की विशेष पहचान को संजोने के लिए कार्यरत हैं। 150 वर्षों से अधिक समय में फैली, रागों की खानदानी अनूठी गतों को डिजिटल तकनीक से सुरक्षित और लिखा गया है।

उस्ताद इरफ़ान खान ने कहा, "इस घराने की विरासत को जीवित रखने की ज़िम्मेदारी अब देश विदेश में बसे मेरे शिष्यों पर है, और मुझे उनकी क्षमता पर भरोसा है।"

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