रूपिंदर कौर जानती हैं कि आत्महत्या के बारे में सोचना कितना पीड़ादायक होता है. 39 साल की रूपिंदर की शादी परिवार की मर्ज़ी से कराई गई थी, जो कि भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों में आम बात है. शादी के बाद साल 2008 में रूपिंदर भारत से मेलबर्न आ गई थीं.
उन्होंने बताया कि उन्हें उनके पति और ससुराल वालों ने शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया. अपने साथ लगातार दुर्व्यवहार के वक्त उन्हें लगा था कि अब आत्महत्या ही इससे बचने का एकमात्र रास्ता है.
मुख्य बातें:
- मेलबर्न के एक उपनगर में कुछ महीने पहले महिलाओं की आत्महत्याओं के मामले में कोरोनर ने प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं.
- निर्देशों में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सांस्कृतिक तौर पर उचित मदद मुहैया करवाने की बात कही गई है.
- घरेलू हिंसा के मामलों में मदद उपलब्ध कराने वाली सामुदायिक संस्थाओं का कहना है कि सरकार को बेहतर नतीजों के लिए उनका हाथ थामना चाहिए.
रूपिंदर कहती हैं, "बाहर से हम एक खुशहाल परिवार की तरह लगते थे. मेकअप करके बाहर जाना, लोगों से बात करना. लेकिन अंदर क्या चल रहा था किसी को इसका अंदाज़ा नहीं था, क्योंकि मैंने कभी शिकायत नहीं की."
रूपिंदर अपनी इस दुख भरी कहानी को पहली बार सार्वजनिक कर रही हैं, इस उम्मीद में कि शायद उनकी कहानी से किसी ऐसे पीड़ित की मदद हो सके तो उनकी तरह प्रताड़ना के बीच चुप्पी साधे हुए हो.
उनके समुदाय में पिछले कुछ ही समय में 6 महिलाओं ने संदिग्ध तौर पर आत्महत्या की है. जाहिर है इससे समुदाय में हड़कंप है. बताया जा रहा है कि इनमें से पांच महिलाएं मां भी थीं और ये सभी एक ही सामाजिक पृष्ठभूमि से थीं.
विक्टोरिया की कोरोनर कोर्ट ने चार मौतों के मामले में सिफारिश की हैंः
- स्वास्थ्य विभाग को दक्षिण एशियाई महिलाओं के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा के संबंध में दी जाने वाली सेवाओं की समीक्षा करनी चाहिए.
- विक्टोरिया पुलिस को विविध पृष्ठभूमि के लोगों से जुड़ी पारिवारिक हिंसा या सामाजिक अलगाव की रिपोर्ट पर एक पारिवारिक हिंसा जांच इकाई का गठन करना चाहिए.
हरिंदर कौर सिडनी में हरमिंदर फाउंडेशन की संस्थापक हैं. यह संस्था घरेलू हिंसा के पीड़ितों को मदद मुहैया कराती है. हरिंदर मानती हैं कोरोना काल में घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं. वह कहती हैं कि घरेलू हिंसा को महज़ एक चश्मे से देखना सही नहीं है क्योंकि घरेलू हिंसा के पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं जिन्हें समझना ज़रूरी है.
हरिंदर कौर कहती हैं, "किसी का स्टूडेंट वीज़ा एक्सपायर हो गया है, कोई और वीज़ा नहीं मिल रहा, कोई आर्थिक तंगी के कारण परेशान है, ऐसे बहुत से कारण हैं जिसके कारण परिवारों में झगड़े होते हैं और पता ही नहीं चलता कि कब ये हिंसा का रूप ले लेते हैं."
हरिंदर मानती हैं कि घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों की ज्यादातर शिकार महिलाएं ही होती हैं लेकिन वो कहती हैं कि कुछ मामलों में पुरुष भी पीड़ित हैं. और ज़ाहिर तौर पर इन मामलों में उन्हें भी मदद की ज़रूरत होती है.
हरिंदर कौर के मुताबिक उनके पास कई ऐसे लोग आते हैं जिनको पहले इस तरह की सेवाओं के बारे में पता ही नहीं था. वह कहती हैं कि हरमन फाउंडेशन के जैसी संस्था के पास वे इसलिए आते हैं कि क्योंकि वे समझते हैं कि भारतीय समुदाय का होने के कारण हम उनकी स्थिति समझ पाएंगे.
वह कहती हैं, "उन्हें पता होता है कि हम समझ पाएंगे कि घरेलू हिंसा का शिकार होने के बाद भी वे महिलाएं घर क्यों नहीं छोड़ना चाहतीं. हम समझ सकते हैं कि वे क्यों ऐसा बोल रही हैं."
हरिंदर कहती हैं कि समुदाय के लोगों को सही मायनों में मदद पहुंचाने के लिए सरकार को सामुदायिक संस्थाओं का हाथ थामना होगा.
पारिवारिक हिंसा के मामलों में आप लाइफ लाइन को 13 11 14 पर या सुसाइड कॉल बैक सर्विस को 1300 659 467 पर कॉल कर सकते हैं.






