सिडनी के स्टैनवेल पार्क में रविवार को दृश्य कुछ ऐसा था कि पुरुष आगे आगे भाग रहे थे और महिलाएं कोड़े लिए उनके पीछे पीछे. जहां फंसे वहीं सटाक. हालांकि पुरुषों को भी जैसे ही मौका मिला उन्होंने पानी और रंगों से खूब बदला उतारा. हरियाणा की इस कोड़ा मार होली को परंपरागत तरीके से मनाया असोसिएशंस ऑफ हरियाणवीज इन ऑस्ट्रेलिया ने, सिडनी में.
असोसिएशन के अध्यक्ष सेवा सिंह बताते हैं कि यह पारंपरिक होली परंपराओं को जिंदा रखने और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश है.

उन्होंने कहा, “हम ऐसे ही होली मनाते हुए बड़े हुए हैं. और हम उस परंपरा को जिंदा रखना चाहते हैं. लेकिन हमारे बच्चों को पता ही नहीं था कि कोड़ों के साथ भी होली मनाई जा सकती है. इसलिए हमने ऐसी होली का आयोजन किया.”
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आयोजन का यह मकसद सफल भी हुआ. बड़ी संख्या में युवा और बच्चे होली मनाने और देखने पहुंचे. 12 साल के सोहम बतरा को खूब मजा आया.
विक्रम बतरा अंग्रेजी में बताते हैं, “महिलाएं पुरुषों को कोड़े लगाती हैं. मुझे भी एक कोड़ा लगा. बड़ा मजा आया.”

होली भारत का त्योहार है. होली रंग और गुलाल का त्योहर है. लेकिन होली पानी और पिचकारी का त्योहार भी है. दर्जनों तरह की होली मनती है. कहीं रंग से तो कहीं गुलाल से. कहीं फूलों से तो कहीं मिट्टी से. होली पर लठ भी चलते हैं और कोड़े भी.

हरियाणा में इस त्योहार को फाग कहते हैं. और फाग पर खेलने का अनोखा अंदाज होता है कोड़ों के जरिए. महिलाएं, खासकर पत्नियां और भाभियां पुरुषों को कोड़ों से पीटती हैं. ये कोड़े आमतौर पर दुपट्टों से बनाए जाते हैं और भिगो लिए जाते हैं. तब बदन पर करारे पड़ते हैं

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अगर किसी को इस संस्कृति का पता ना हो तो डर भी जाए. तीन-तीन चार-चार महिलाएं एक पुरुष पर कोड़े बरसाती दिखें या पुरुष किसी महिला को उठाकर पानी में गोते लगवाते दिखें तो अनजान लोगों को अजीब तो लगेगा. लेकिन सेवा सिंह बताते हैं कि यहां किसी को चोट पहुंचाने की किसी की मंशा नहीं होती. यह सिर्फ एक खेल है.
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