दरअस्ल अमन अभी महज़ 19 साल के हैं और वो पिछले कई सालों से एनिमेशन में लैक्चर देते हैं. अमन आर्थिक तौर पर एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. पिता मोहम्मद रहमान मैकेनिक हैं. अमन जब छोटे थे तो उनके बड़े भाई कम्यूटर का प्रयोग किया करते थे. अमन कहते हैं कि उन्हें कंप्यूर में काम करने की ललक थी. और ये ही शौक उन्हें इतने आगे ले गया कि वो दुनिया के सबसे कम उम्र के एनिमेशन लैक्चरर और एनिमेशन में डॉक्टरेट की उपाधि पाने वाले शख्स बने. उन्हें श्रीलंका की कोलंबो यूनिवर्सिटी ने कम्पयूटर के क्षेत्र में उनके काम को देखते हुए डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया.

अमन के बारे में एक और बड़ी बात ये है कि वो महज़ 9 साल की उम्र में एनिमेशन पर लेक्चर देने लगे थे. वो कहते हैं कि बचपन में जब वो एनिमेटेड मूवीज़ देखते थे तो उन्हें जानने की इच्छा होती थी कि आखिर कैसे ये कार्टून चलते फिरते हैं.
अमन कहते हैं कि वो आज जो कुछ भी हैं उसके पीछे उनके पिता की कड़ी मेहनत भी है वो कहत हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनके पिता ने उन्हें हर वो चीज़ देने की कोशिश की जो उन्हें चाहिए थी. अमन कहते हैं कि उन्हें कुदरत की देन तो है कि वो बचपन से ही इस तरह सोच सकते थे. लेकिन उन्होंने मंजिलें पाने के लिए कड़ी मेहनत भी की है.

एनिमेशन के बारे में अमन कहते हैं कि हर एनिमेशन उन्हें अच्छा लगता है. लेकिन वो मानते हैं कि किसी अच्छे संदेश के साथ किया गया एनिमेशन बेहतरीन होता है. आपको पता है अमन पर हाल ही में एक शॉर्ट फ़िल्म भी बनी है अमन रहमान द लिटिल बिलगेट्स.
अमन बताते हैं कि यंगेस्ट अचीवर के तौर पर उन्हें गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी नॉमिनेशन मिला. अपने एनीमेशन के बारे में बताते हुए अमन कहते हैं कि कटते पेड़ों और मतदान के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए बनाया गया एनिमेशन लोगों द्वारा काफी सराहा गया.
अमन कहते हैं उन्होंने कई एनीमेशन मूवीज़ में भी काम किया है. लेकिन वो अकेले कुछ बनाना पसंद करते हैं. क्योंकि वो मानते हैं कि तब वो केवल एनीमेशन नहीं करते बल्कि एक संदेश देने की भी कोशिश करते हैं. अमन कहते हैं कि एनिमेशन में मास्टर्स करना चाहते हैं और वो चाहते हैं.
मास्टर्स के बाद मैं चाहता हूं कि सरकार मुझे एनिमेशन लैब खोलने में सहायता दे ताकि मैं युवाओं को मुफ्त में एनिमेशन सिखा सकूं.




